उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन
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भूखमरी के भीषण दौर से गुजर रहे उत्तर कोरिया की, भारत ने वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) के तहत 10 लाख डॉलर (करीब 7 करोड़ रु.) की सहायता राशि प्रदान की है। जिसकी जानकारी मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने अपनी मासिक रिपोर्ट में दी है। इसमें छपी रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया में करीब एक करोड़ से ज्यादा लोग खाद्य संकट से जूझ रहे हैं। जो अपने आप में इस देश की बुरी स्थिति की दर्शाता है।
बता दें कि उत्तर कोरिया करीब चार दशक से सबसे भीषण सूखे की मार से गुजर रहा है। देश की आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने कुछ महीनों पहले एक रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें यह बताया था कि पिछले पांच महीनों में देशभर में औसतन 54.4 मिलीमीटर बारिश हुई। जो देश में साल 1982 के बाद हुई सबसे कम बारिश थी। जिसके चलते देश में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं इसी सूखे की मार के कारण अनाज पहले के मुताबिक बहुत कम पैदा हुआ था।
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया कि तरफ से यह रिपोर्ट ऐसे समय जारी की गई थी , जब संयुक्त राष्ट्र खाद्य एजेंसियों ने एक संयुक्त आकलन में कहा था कि उत्तर कोरिया में करीब एक करोड़ लोग ‘खाने की भीषण कमी’ से जूझ रहा है। वैसे सितंबर माह में डब्ल्यूएफपी ने उत्तर कोरिया को 1905 टन की खाद्य सहायता दी थी। इस सहायता से देश में कुल 5,84,800 लोगों को मदद मिली। वहीं, अगस्त में 1,425 टन की सहायता दी गई थी।
हालांकि इससे पहले दक्षिण कोरिया ने डब्ल्यूएफपी के जरिए प्योंगयांग को 50 हजार टन चावल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। जिसको उत्तर कोरिया ने सिरे से नाकार दिया था।
क्या होता है डब्ल्यूएफपी
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) विश्व व्यापी भूखमरी से निपटने के लिए विश्व की सबसे बड़ी मानवीय एजेंसी है। जो संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक भाग है। जो स्वेच्छा से वित्तपोषित किया जाता है। इसका गठन 1961 में किया गया है। इस संस्था के तहत प्रत्येक पुरूष, स्त्री और बच्चे को एक सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक खाद्य प्रदार्थों को उन तक पहुंचाने की पहल की जाती है।