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'किम जोंग उन' ने कोरोना वायरस का फिर बनाया मजाक, महीने भर के अंदर चौथी बार किया मिसाइल का परीक्षण

Mon, 30 Mar 2020 01:52 PM IST
श्रीधर मिश्रा इंटरनेशनल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किम जोंग उन - फोटो : Social media
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दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी के बीच परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया ने "सुपर-लार्ज मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर" का सफल परीक्षण किया है। सोमवार को उत्तर कोरिया की मीडिया की तरफ इस परीक्षण की पुष्टि की गई है। हालांकि, इस दौरान ड्रिल में 'किम जोंग उन' की मौजूदी रही या नहीं इसे लेकर कुछ भी नहीं बताया गया है। दरअसल विश्लेषकों का कहना है कि प्योंगयांग अपने लॉन्च को सामान्य दिखाने की कोशिश करता है। यही कारण है कि 'किम जोंग उन' को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया है। 

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दुनिया भर के देश जहां कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं, वहीं इस महीने उत्तर कोरिया ने अब तक चार मिसाइल परीक्षण किए हैं। दरअसल कोरोना वायरस को लेकर उत्तर कोरिया यह कहता आया है कि उसके देश में COVID-19 का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया है कि 'किम' ने रविवार का परीक्षण निर्देशित किया था, जो कि हैरान करने वाली बात है। दरअसल अब तक जब भी उत्तर कोरिया कोई भी मिसाइल का परीक्षण करता था, तब उसमें 'किम जोंग उन' की सक्रियता और उनकी तस्वीर को हमेशा बढ़चढ़ कर दिखाया जाता था। लेकिन इस बार किए गए परिक्षण में 'किम जोंग उन' की कोई भी तस्वीर सामने नहीं आई है। बल्कि, इस बार उत्तर कोरिया की न्यूज एजेंसी KCNA की तरफ से बताया गया है कि इस परीक्षण का नेतृत्व सत्तारूढ़ पार्टी के उपाध्यक्ष री प्योंग चोल और संचालन अकादमी ऑफ़ नेशनल डिफेंस साइंस की तरफ से किया गया है।
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दरअसल दक्षिण कोरिया ने रविवार को ही बता दिया था कि उत्तर कोरिया की तरफ से दो संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइलें समुद्र में छोड़ी गई हैं। दक्षिण कोरिया ने कहा थाजब पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला कर रही है, ऐसे में उत्तर कोरिया का मिसाइलों का परीक्षण बिल्कुल गलत है।

इस पूरे मामले पर दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने कहा था कि रविवार की सुबह उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय शहर वोनसान से निकली मिसाइलें कोरियाई प्रायद्वीप और जापान के बीच समुद्र में गिरते हुए देखी गईं थी। उन्होंने बताया था मिसाइलों की अधिकतम ऊंचाई 30 किलोमीटर थी, जो करीब 230 किलोमीटर तक सफर करते हुए देखी गईं। उत्तर कोरिया की इस कार्रवाई पर पहले से ही दक्षिण कोरिया और अमेरिका के खुफिया अधिकारी नजर बनाए हुए थे।

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