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रसायन विज्ञान: हेनरी कागन, केन्सो सोआई को नोबेल पुरस्कार; नॉन-लीनियर प्रभावों की खोज के लिए मिला सम्मान

Wed, 07 Oct 2026 03:23 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,स्टॉकहोम
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नोबेल पुरस्कार - फोटो : एक्स
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साल 2026 का रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार फ्रांस के हेनरी कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। स्वीडिश रॉयल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने यह सम्मान उन्हें असममित कार्बनिक संश्लेषण में नॉन-लीनियर प्रभावों और ऑटोकैटेलिसिस की खोज के लिए दिया गया है। हेनरी कागान पेरिस विश्वविद्यालय से और  केन्सो सोई टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस से जुड़े हुए हैं। 

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इस खोज के लिए मिला सम्मान
उन्होंने रसायन विज्ञान में 'मिरर इमेज' (दर्पण-प्रतिबिंब) चुनने की प्रक्रिया पर काम किया। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई है। उन्होंने बताया कि किसी रासायनिक प्रक्रिया में एक-दूसरे की मिरर इमेज जैसे दो अणुओं में से सिर्फ एक ही रूप कैसे बनाया जा सकता है। यह खोज दवाओं समेत कई तरह के रसायन बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

समिति सदस्य ने एक प्रयोग के जरिए इसे आसान भाषा में समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हमारे दोनों हाथ लगभग एक जैसे दिखते हैं, लेकिन बायां हाथ दाएं और दायां बाएं की जगह नहीं ले सकता। कुछ अणु भी ऐसे ही होते हैं। इनके दो रूप होते हैं। दोनों एक-दूसरे की मिरर इमेज होते हैं। परेशानी तब आती है जब वैज्ञानिक ऐसे अणु बनाते हैं, तो कई बार दोनों रूप एक साथ बन जाते हैं। इससे समस्या का हल नहीं निकलता।

किसी दवा का एक रूप शरीर में बीमारी पर काम कर सकता है, जबकि उसके मिरर इमेज से नुकसान हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक चाहते थे कि जिस अणु की आवश्यकता है वही बने। यह सिर्फ दवाओं की समस्या नहीं थी। हमारे शरीर में भी इसका एक उदाहरण मिलता है। अमीनो एसिड के दो मिरर इमेज वाले रूप हो सकते हैं, लेकिन शरीर प्रोटीन बनाने के लिए इनमें से सिर्फ एक रूप का इस्तेमाल करता है।

हेनरी बी. कगन ने 1986 में एक हेनरी कगन ने केमिकल रिएक्शन को कंट्रोल करने का एक नया तरीका खोजा, जिससे मिरर इमेज (प्रतिबिंब) में से किसी एक की ज्यादा मात्रा बनाई जा सकी। उनकी खोज उन केमिस्ट्स के लिए क्रांतिकारी है जो दवाइयों, फ्लेवर, खुशबू और नए मटीरियल बनाने के लिए रिएक्शन विकसित करते हैं। इसके बाद केन्सो सोआई ने इस काम को आगे बढ़ाया। उन्होंने ऐसी केमिकल रिएक्शन डिजाइन की जिसमें संभावित मिरर इमेज में से सिर्फ एक ही बनी। वही आगे अपने जैसे और अणु बनाने में मदद करता है।

वर्ष 2025 का पुरस्कार जापान के सुसुमु कितागावा, ऑस्ट्रेलिया के रिचर्ड रॉबसन और अमेरिका के ओमर एम. यागी को दिया गया था। उन्हें मेटल-ऑर्गैनिक फ्रेमवर्क्स के विकास के लिए दिया है। साल 1901 से 2025 के बीच 198 व्यक्तियों को 117 रसायन विज्ञान पुरस्कार दिए गए हैं। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है।
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