नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मरिया कोरिना मचाडो।
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वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो की अनुपस्थिति ने बुधवार को ओस्लो में आयोजित नोबेल शांति पुरस्कार समारोह को भावुक बना दिया। सुरक्षा कारणों से छिपकर रह रहीं मचाडो की जगह उनकी बेटी एना कोरीना सोसा ने पुरस्कार ग्रहण किया। नोर्वेजियन नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्गेन वॉटन फ्राइडनेस ने समारोह में कहा मारिया कोरीना मचाडो ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन उनके लिए यहां पहुंचना बेहद जोखिम भरा था। हम खुश हैं कि वह सुरक्षित हैं।
मचाडो को पिछले एक वर्ष से सरकार द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। 9 जनवरी को उन्हें संक्षिप्त हिरासत में भी लिया गया था, जिसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दीं।
ऑडियो में बताईं समारोह में नहीं शामिल होने की वजह
नोबेल वेबसाइट पर जारी मचाडो के फोन कॉल के ऑडियो में उन्होंने कहा मेरे यहां पहुंचने के लिए कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डाली। यह पुरस्कार वेनेजुएला के लोगों के संघर्ष का सम्मान है। उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही अपने परिवार और समर्थकों से मिलने ओस्लो पहुंचेंगी, दो साल बाद पहली बार।
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लैटिन अमेरिकी नेताओं ने दिखाई एकजुटता
समारोह में अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जावियर मिलेई, इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ, पनामा के राष्ट्रपति जोसे राउल मुलिनो और पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति मचाडो के लोकतांत्रिक संघर्ष के समर्थन का प्रतीक बनी। 62 वर्षीय मचाडो को यह पुरस्कार लोकतांत्रिक बदलाव के लिए उनके साहसिक प्रयासों के लिए दिया गया है। उन्होंने विपक्षी प्राइमरी चुनाव जीतकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को चुनौती दी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया। उनकी जगह पूर्व राजनयिक एडमुंडो गोंजालेस ने चुनाव में हिस्सा लिया, जिन्हें बाद में स्पेन में शरण लेनी पड़ी।
वेनेजुएला में बढ़ा दमन और मानवाधिकार उल्लंघन
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसियों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने वेनेजुएला में दमनकारी कार्रवाइयों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक उत्पीड़न पर चिंता जताई है। राष्ट्रीय चुनाव परिषद ने 28 जुलाई 2024 के चुनाव में मादुरो को विजेता घोषित किया, जिसके बाद दमन और तेज हो गया।
कई नोबेल विजेता पहले भी अनुपस्थित रहे
नोबेल पुरस्कार इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब कोई विजेता समारोह में उपस्थित नहीं हो सका हो। कई राजनीतिक कारणों व दमनकारी परिस्थितियों के चलते पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।