वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत हालिया मंदी के बावजूद विकास को गति देने के अनुकूल वृहद आर्थिक माहौल बनाने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की वार्षिक बैठक में वित्त मंत्री ने कहा, भारत मजबूती से राजकोषीय एकीकरण की राह पर है। वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी का 3.3 फीसदी राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 3.4 फीसदी था।
सीतारमण ने कहा, देश की वृद्धि में मंदी के कारण पैदा हुई चुनौतियों को हल करने के लिए मोदी सरकार के सुधारों की सीरीज के हिस्से के तौर पर विविधतापूर्ण नीतियों का सहारा लिया गया है। हालिया मंदी के बावजूद आने वाले सालों में हमारी संभावित विकास दर कहीं ज्यादा ऊंची होगी।
बता दें कि 2018 में भारत की 6.8 फीसदी की वास्तविक विकास दर के विपरीत आईएमएफ ने मंगलवार को जारी अपने ताजा आर्थिक आउटलुक में देश की विकास दर 2019 में महज 6.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि आईएमएफ ने यह भी कहा है कि 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 फीसदी की विकास दर छूने के आसार हैं।