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100 साल बाद नई जंगली बिल्ली की खोज: बोलीविया के जंगलों में मिली नन्ही ‘टिल्कायो’, क्या है इसकी खासियत?

Sat, 19 Sep 2026 04:06 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, ला पाज।

सार

बोलीविया में वैज्ञानिकों ने लेपर्डस टिल्कायो नाम की जंगली बिल्ली की एक नई प्रजाति की पहचान की है। यह खोज खास इसलिए है क्योंकि एक सदी से ज्यादा समय बाद किसी जीवित जंगली बिल्ली की नई प्रजाति को औपचारिक रूप से नाम दिया गया है। डीएनए जांच से पता चला कि इसकी वंशावली करीब 14 लाख साल पहले अलग हुई थी। फिलहाल इसका अस्तित्व बोलीविया के युंगास जंगलों में दर्ज हुआ है और वैज्ञानिक इसकी संख्या, व्यवहार व आवास का पता लगाने में जुटे हैं।
 
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टिल्कायो बिल्ली - फोटो : @सोशल मीडिया/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में वैज्ञानिकों ने जंगली बिल्ली की एक ऐसी प्रजाति की पहचान की है, जिसके बारे में अब तक दुनिया को जानकारी नहीं थी। खास बात यह है कि यह बिल्ली जंगल में छिपी नहीं मिली, बल्कि बोलीविया के एक वन्यजीव आश्रय केंद्र में वर्षों से मौजूद थी। एक स्थानीय परिवार ने इसे बचाकर यहां पहुंचाया था। वैज्ञानिकों ने गुरुवार को करंट बायोलॉजी जर्नल में इसके बारे में जानकारी प्रकाशित की। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एक सदी से भी ज्यादा समय बाद पहली बार है, जब किसी नई जीवित जंगली बिल्ली की प्रजाति को औपचारिक रूप से पहचाना और नाम दिया गया है।
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यह बिल्ली दिखने में कैसी है और इतनी खास क्यों है?
बोलीविया की जीवविज्ञानी पाओला नोगालेस-अस्कारुंज ने इस बिल्ली को पहली बार देखा तो उसके छोटे आकार ने उनका ध्यान खींचा। वह बोलीविया के युंगास क्षेत्र के एक वन्यजीव आश्रय केंद्र में स्वयंसेवा करती थीं। उनके एक सहयोगी को बिल्ली का रूप बाकी बिल्लियों से अलग लगा, इसलिए उन्होंने पाओला को इसे देखने के लिए बुलाया। करीब 10 साल के इस नर जानवर की लंबाई सिर से पूंछ के आधार तक करीब 18 इंच यानी 46 सेंटीमीटर है और वजन सिर्फ तीन पाउंड यानी करीब 1.4 किलोग्राम है। इसके हल्के भूरे रंग के शरीर पर तेंदुए जैसी गहरे रंग की धारियां और धब्बे हैं।

वैज्ञानिकों ने कैसे पता लगाया कि यह अलग प्रजाति है?
इस सवाल का जवाब डीएनए जांच से मिला। शोधकर्ताओं ने दक्षिण अमेरिका के अलग-अलग इलाकों में मौजूद 30 से ज्यादा बिल्लियों के पूरे जीनोम की तुलना की। इनमें कोलंबिया, पेरू और ब्राजील की बिल्लियां भी शामिल थीं। जहां ताजा नमूने उपलब्ध नहीं थे, वहां अमेरिका और यूरोप के संग्रहालयों में सुरक्षित हड्डियों और खाल से डीएनए लिया गया। जांच में पता चला कि आश्रय केंद्र में मौजूद बिल्ली ऐसी प्रजाति से संबंधित है, जिसकी वंशावली करीब 14 लाख साल पहले उसकी करीबी प्रजातियों से अलग हो गई थी।
  • नाम क्या रखा गया: वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम लेपर्डस टिल्कायो रखा है। ‘टिल्कायो’ नाम नया गढ़ा हुआ नहीं है, बल्कि बोलीविया के एंडीज पर्वतीय क्षेत्र के उष्णकटिबंधीय बादल वाले जंगलों में रहने वाले स्थानीय समुदाय इस जानवर के लिए पहले से इस नाम का इस्तेमाल करते रहे हैं।
  • स्थानीय ज्ञान को सम्मान: शोधकर्ताओं ने स्थानीय समुदायों की पारंपरिक जानकारी और इस जानवर से उनके संबंध को सम्मान देने के लिए उसी नाम को वैज्ञानिक नाम में शामिल किया।
  • आखिरी जंगली बिल्ली कब मिली थी: वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे पहले किसी जीवित जंगली बिल्ली की नई प्रजाति को औपचारिक रूप से 1923 में पहचाना गया था। वह उरुग्वेयन पम्पास कैट थी।
  • टाइगर कैट का पुराना रहस्य: दक्षिण अमेरिका की टाइगर कैट्स देखने में एक-दूसरे से बहुत मिलती-जुलती हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय तक उन्हें एक ही प्रजाति मानते रहे। नए डीएनए विश्लेषण ने इस धारणा को बदलने में मदद की है।
  • अब कितनी प्रजातियां मानी गईं: शोधकर्ताओं के डीएनए विश्लेषण से दक्षिण अमेरिका की टाइगर कैट समूह में कम से कम पांच अलग-अलग प्रजातियों के संकेत मिले हैं। इनमें चार पहले से पहचानी जा चुकी थीं, जबकिलेपर्डस टिल्कायो नई पहचानी गई प्रजाति है।
  • जंगल में अभी बहुत कुछ अज्ञात: वैज्ञानिकों को अभी यह पता नहीं है कि जंगल में इन बिल्लियों की कुल संख्या कितनी है। उनके भोजन, व्यवहार और रहने की जगह के बारे में भी ज्यादा जानकारी जुटानी बाकी है।
  • कहां तक फैली है प्रजाति: अभी तक नई बिल्ली की मौजूदगी सिर्फ बोलीविया के युंगास जंगलों में पक्के तौर पर दर्ज हुई है। हालांकि इसका पूरा भौगोलिक क्षेत्र कितना बड़ा है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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इस खोज के बाद वैज्ञानिकों के सामने अगली चुनौती क्या?
वैज्ञानिक अब इन छोटी बिल्लियों को जंगल में खोजकर उनके बारे में ज्यादा जानकारी जुटाना चाहते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक अभी यह पता लगाना बाकी है कि जंगल में इनकी कितनी संख्या है, वे क्या खाती हैं, कैसे व्यवहार करती हैं और उनका वास्तविक आवास कितना बड़ा है। यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प के विकासवादी जीवविज्ञानी और अध्ययन के सह-लेखक जोनास लेस्क्रोआर्ट ने कहा कि बिल्ली परिवार जैसे अच्छी तरह अध्ययन किए गए समूह में भी ऐसी जैव विविधता छिपी हो सकती है, जिसके बारे में वैज्ञानिकों को पता नहीं है।

नई प्रजाति की खोज से इसे बचाने में कैसे मदद मिलेगी?
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि नई प्रजाति की पहचान उसके जंगल के आवास को बचाने में मदद करेगी। युंगास के जंगलों को वनों की कटाई और खनन जैसी गतिविधियों से खतरा है। शोधकर्ता जोनास लेस्क्रोआर्ट ने कहा कि ऐसी खोजों में तेजी लाने की जरूरत है, क्योंकि जैव विविधता पर दबाव बढ़ रहा है और कई प्रजातियां अभी हमारे सामने ही खत्म हो रही हैं।
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