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व्हाइट हाउस में मीडिया बैन: ट्रंप तीन संस्थानों पर भड़के, सीएनएन, एमएसनाउ और पॉलिटिको प्रतिबंधित; तनाव बरकरार

Sat, 19 Sep 2026 03:53 AM IST
ज्योति भास्कर पीटीआई, मॉस्को।

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने का एलान किया है। इनकी कवरेज को उन्होंने खुद के खिलाफ बताया और कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी और भी कार्रवाई हो सकती है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन मीडिया संस्थानों- सीएनएन, एमएसएनओडब्ल्यू और पॉलिटिको को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। ट्रंप ने इन मीडिया आउटलेट्स पर 'अनुकूल कवरेज' न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह इनकी रिपोर्टिंग 'फेक न्यूज' का परिणाम है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में अन्य मीडिया संस्थानों पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। शुक्रवार को (स्थानीय समय) ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके इस फैसले की जानकारी दी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मैं CNN, MSNBC और Politico को व्हाइट हाउस से तत्काल प्रभाव से बैन कर रहा हूं क्योंकि वे लगातार 'फेक न्यूज़' (झूठी खबरें) दिखा रहे हैं!

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सुझाव न मानने पर प्रतिबंध, अदालत में मुकदमा दायर
यह कदम अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए एक नई चुनौती पेश करता है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार किया है। फरवरी 2025 में, ट्रंप ने एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों को ओवल ऑफिस, एयर फोर्स वन और अन्य छोटे आयोजनों से बाहर रखने का फैसला किया था। यह कदम एसोसिएटेड प्रेस द्वारा मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने के उनके सुझाव का पालन न करने के प्रतिशोध में उठाया गया था। एसोसिएटेड प्रेस ने इस मामले में मुकदमा दायर किया है। ये कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है।
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ट्रंप और किन कंपनियों पर कार्रवाई कर चुके हैं?
गौरलतब है कि जनवरी, 2025 में पद संभालने के बाद से ट्रंप लंबे समय से समाचार कवरेज पर नाराजगी व्यक्त करते रहे हैं जिन्हें वे अपने प्रति प्रतिकूल मानते हैं। उनका समाचार संगठनों के खिलाफ मुकदमे दायर करने और व्यक्तिगत पत्रकारों पर सोशल मीडिया या व्यक्तिगत रूप से हमला करने का इतिहास रहा है। सत्ता में लौटने के बाद से, ट्रंप ने द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, बीबीसी और अन्य समाचार आउटलेट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर चुके हैं।

क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मीडिया आउटलेट्स पर लगाए गए प्रतिबंधों को प्रथम संशोधन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर सीधा हमला माना जा रहा है। आलोचकों का तर्क है कि सरकार का काम मीडिया को सेंसर करना नहीं, बल्कि पारदर्शी तरीके से काम करना है। मीडिया की आलोचना करने का अधिकार लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और ऐसे प्रतिबंधों से जनता की सूचना तक पहुंच सीमित हो सकती है।

क्या भविष्य में और भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे?
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि 'आने वाले दिनों में ऐसे और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, यह संकेत देता है कि यह मामला यहीं समाप्त नहीं होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन अन्य समाचार संगठनों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई करता है। ऐसे कदम मीडिया की स्वतंत्रता और सार्वजनिक विमर्श पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

मीडिया के साथ संबंध तनावपूर्ण
ट्रंप प्रशासन और मीडिया के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। व्हाइट हाउस में मीडिया पर लगाए गए ये प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर एक गंभीर सवाल खड़ा करते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले का आगे क्या परिणाम होता है और क्या यह भविष्य में अन्य मीडिया संस्थानों के लिए एक मिसाल कायम करता है।

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