भारतीय उच्चायोग ने मंगलवार को कहा कि भारत ने कर्ज में डूबे श्रीलंका को इस साल जनवरी से ऋण, क्रेडिट लाइनों और क्रेडिट स्वैप में 3 अरब डॉलर से अधिक की मदद दी है, क्योंकि यह देश आजादी के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। भारत ने श्रीलंका के तेजी से घटते ईंधन स्टॉक को फिर से भरने के लिए अपनी मौजूदा वित्तीय मदद को 200 मिलियन डॉलर तक बढ़ा दिया था।
श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की भारी कमी
श्रीलंका में चल रहा संकट विदेशी मुद्रा की कमी के कारण हुआ है, जिसका अर्थ है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है। भारतीय उच्चायोग के एक बयान में कहा गया है कि भोजन, दवाओं और अन्य जरूरी सामान की खरीद के लिए 1 अरब डालर की क्रेडिट सुविधा पहले से ही चालू है, साथ ही कहा कि भारत की ओर से लगभग 16,000 मीट्रिक टन चावल भी वितरित किया जा रहा है।
बयान में कहा गया है कि क्रेडिट लाइन के तहत चावल, दवाओं और औद्योगिक कच्चे माल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की अतिरिक्त खेप दी जा रही है। डीजल, पेट्रोल और विमानन ईंधन जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए 500 मिलियन डॉलर की एक अलग मदद दी जाएगी जिसमें विभिन्न प्रकार के ईंधन की 9 खेपों की डिलीवरी होनी है।
इस साल अप्रैल में सिंहली और तमिल नव वर्ष से पहले भारत ने सद्भावना के रूप में अतिरिक्त 11,000 मीट्रिक टन चावल भेजा था। फरवरी में नई दिल्ली ने ईंधन स्टॉक की खरीद के लिए श्रीलंका को 500 अरब डॉलर का अल्पकालिक ऋण दिया था। बयान में कहा गया है कि अब तक करीब 400,000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति की जा चुकी है और जल्द ही और खेप आ जाएगी।