कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सोमवार को पेरिस और लंदन दौरे पर जा रहे हैं, जहां वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडा की संप्रभुता और अर्थव्यवस्था पर किए गए हमलों से निपटने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे। कार्नी ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए जानबूझकर उन दो देशों की राजधानी शहरों को चुना, जिन्होंने कनाडा के अस्तित्व में अहम भूमिका निभाई थी।
अपने शपथ ग्रहण समारोह में मार्क कार्नी ने क्या कहा था
अपने शपथ ग्रहण समारोह में कार्नी ने शुक्रवार कहा था कि कनाडा फ्रांसीसी, अंग्रेजी और आदिवासी समुदायों की नींव पर बना है। उन्होंने कहा कि कनाडा पूरी तरह से अमेरिका अलग है और कभी भी किसी भी रूप में अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा।
मैक्रों और स्टार्मर से मुलाकात करेंगे मार्क कार्नी
टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नेल्सन विसमैन ने कहा, इस यात्रा का कारण ट्रंप का प्रभाव है। ट्रंप का प्रभाव कार्नी के लिए हर चीज से ऊपर है। कार्नी पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे और फिर लंदन जाएंगे, जहां वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का मकसद व्यापार में विविधता लाना और शायद ट्रंप के टैरिफ का जवाब देने के लिए तालमेल बनाना है। कार्नी किंग चार्ल्स तृतीय से भी मिलेंगे। इंग्लैंड की यात्रा उनके लिए एक तरह से घर वापसी जैसी है, क्योंकि कार्नी बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर हैं। वह बैंक ऑफ इंग्लैंड के तीन सौ साल से अधिक के इतिहास में पहले गैर-ब्रिटेन गवर्नर बने थे। इसके बाद वह कनाडा के आर्कटिक क्षेत्र में जाएंगे और फिर ओटावा लौटेंगे।
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'ट्रंप से मिलने को तैयार हूं, कनाडा की संप्रभुता का सम्मान हो'
कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ट्रंप से मुलाकात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल तब ही उनसे मुलाकात करेंगे जब वह कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह वॉशिंगटन की यात्रा नहीं करेंगे, लेकिन उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात करेंगे।
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अमेरिकी सामान खरीदने से बच रहे कनाडाई नागरिक
ट्रंप की ओर से 25 फीसदी टैरिफ लगाए जाने औ कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात से कनाडाई नाराज हैं और अब कई लोग अमेरिकी सामान खरीदने से बच रहे हैं। व्यापार युद्ध को देखत हुए कार्नी की सरकार अमेरिका में बने एफ-35 लड़ाकू विमानों की खरीद की समीक्षा कर रही है। ट्रंप ने जब व्यापार युद्ध शुरू किया था, तब लिबरल पार्टी की सरकार ऐतिहासिक चुनावी हार के कगार पर थी। ट्रंप ने कई बार कहा है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनना चाहिए।
'कार्नी के वॉशिंगटन जाने से कोई फायदा नहीं'
कनाडाई इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर रॉबर्ट बाथवेल ने कहा कि कार्नी के लिए ट्रंप से मिलने का कोई मतलब नहीं है। बाथवेल ने कहा, वॉशिंगटन जाने का कोई फायदा नहीं है। ट्रंप की अपने मेहमानों को शर्मिंदा करने की कोशिश होती है, जैसा कि (पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन) ट्रूडो के साथ हुआ।
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व्यापार नीति को विविधतापूर्ण बनाए कनाडा: प्रोफेसर डैनियल बेलैंड
वहीं, मैकगिल विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल बेलैंड ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि कनाडा अपनी व्यापार नीति को विविधतापूर्ण बनाए, खासकर जब अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध जारी है। कनाडा का 75 फीसदी से अधिक निर्यात अमेरिका को जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक संप्रभुता कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बेलैंड ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप की कनाडा और ग्रीनलैंड के बारे में आक्रामक बातें और रूस, जो एक मजबूत आर्कटिक शक्ति है, और अमेरिका के बीच समीकरण ने हमारे इस दूरस्थ लेकिन रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।'
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