जलप्रलय आने के तीसरे दिन नेपाल के लोगों की जिंदगी वक्त के साथ सामान्य हो रही थी कि शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे नेपाल प्रहरी (पुलिस) की ओर से जारी हाई अलर्ट ने अफरा-तफरी मचा दी। फुर्के खोला बाजार में नदी किनारे की ओर मकान-दुकान से महिलाएं सामान समेटने लगीं।
सवाल से मां की आंखें भर आईं
इसी बीच कॉपी-किताब से भरी बैग हाथ में लिए सुष्मिता ने अपनी मां सुमिष्टा से बड़ी मासूमियत से पूछा-मां कहां रहेंगे और क्या खाएंगे। मामा के यहां भी जाने लायक नहीं है। मासूम के इस सवाल से मां की आंखें भर आई और पास में मौजूद पड़ोसियों के चेहरे पर दर्द उभर आया। आपदा के बीच सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य बच्चों का था।
बच्चों ने अपनी किताब-कॉपियां रखीं
जब परिवार जरूरी सामान समेट रहे थे, तब बच्चों ने अपनी किताब-कॉपियां भी साथ रख लीं। उनके लिए यह सामान महज कागज के कुछ पन्ने नहीं थे बल्कि उनका भविष्य था। एक बच्चे ने अपनी मां से मासूमियत से पूछा—‘मां, अब हम रहेंगे कहां और खाएंगे क्या।
आसपास खड़े लोगों की आंखें नम
मां का जवाब नहीं मिला तो का अगला सवाल था-‘हम फिर घर कब आएंगे’ यह सुनकर आसपास खड़े लोगों की आंखें नम हो गईं। दरअसल, बाढ़ का पानी केवल घरों और सामान को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि लोगों के सपनों को भी अपने साथ बहा ले जाता है।
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फिर बाढ़ की आहट से लोगों में थी घबराहट
अभी अपनों की तलाश पूरी भी नहीं हुई कि नए सिरे से बाढ़ की चेतावनी ने नेपाल के मलेखु, फुर्के खोला और गजुरी क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ा दी। सेना के जवानों ने शुक्रवार को तीनों गांवों को खाली करा दिया। त्रिशूली की तेज होती धारा के साथ लोगों के दिलों की धड़कनें भी बढ़ती रहीं। मलेखु बाजार से करीब एक किलोमीटर आगे एक पुल बाढ़ में बह गया। पुल बहने की खबर के बाद पलायन और तेज हो गया।
नेपाल ने भारत-चीन से तत्काल 42 बेलीब्रिज बनाने का अनुरोध किया
काठमांडो। नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन सुचारु करने के लिए भारत और चीन से तत्काल 42 बेलीब्रिज बनाने में सहयोग का अनुरोध किया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सहयोग मांगा गया है। सरकार ने विदेशी सहयोग को आपदा प्राधिकरण की आवश्यकता और मांग के आधार पर स्वीकार करने की व्यवस्था की है।