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नेपाल: पुष्प कमल दहल को केपी शर्मा ओली का संदेश- पार्टी में रहना है तो झुक कर रहो

Sun, 29 Nov 2020 03:07 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
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केपी शर्मा ओली-पुष्प कमल दहल (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
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नेपाल में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का अंदरूनी झगड़ा अब ऐसा लगता है कि आर-पार के मुकाम पर पहुंच गया है। शनिवार देर शाम तक चली पार्टी सेक्रेटेरियट (सचिवालय) की बहु-प्रतीक्षित बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने ये साफ कर दिया कि उनका पुष्प कमल दहल गुट से झुक कर समझौता करने का कोई इरादा नहीं है। अब यह दहल पर है कि चाहें तो मेलमिलाप की पहल करें या फिर अपना अलग रास्ता तलाशें।

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बैठक में ओली ने अपना राजनीतिक दस्तावेज पेश किया। ये दस्तावेज 13 नवंबर को दहल की तरफ से पेश 19 पेज के राजनीतिक दस्तावेज के जवाब में है। ओली के दस्तावेज का साफ संदेश था कि पार्टी के बॉस वो ही हैं। नेपाली मीडिया में छपे ब्योरे के मुताबिक ओली ने दहल पर निजी टिप्पणियां कीं और उनकी राजनीतिक हैसियत पर भी सवाल उठा दिया। 


दहल ने 13 नवंबर को हुई सेक्रेटेरियट की बैठक में पेश अपने दस्तावेज में ओली पर कई इल्जाम लगाए थे। ओली ने अपने 38 पेज के दस्तावेज में उनका बिंदुवार जवाब दिया और उलटे दहल पर कई आरोप लगा दिए। साथ ही उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल को भी आड़े हाथों लिया। नेपाल अब ओली के खिलाफ हो गए हैं और फिलहाल उन्होंने दहल से हाथ मिला लिया है। ओली ने उन्हें याद दिलाया कि दहल ने ही उन्हें राष्ट्रपति नहीं बनने दिया था।
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ओली ने आरोप लगाया है कि दहल ने मतभेदों को दुश्मनी में बदल दिया है। इस तरह उन्होंने नेपाल के कम्युनिस्ट आंदोलन को गहरे संकट में धकेल दिया है। ओली ने कहा कि 2018 में दहल की पार्टी के साथ अपनी पार्टी के विलय पर राजी होकर असल में उन्होंने दहल के समाप्त हो चुके राजनीतिक करियर को बचा लिया था। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि 2017 में मेयर के चुनाव में दहल ने अपनी बेटी को जितवाने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लिया।

यहां के राजनीतिक विश्लेषकों ने अपने तीखे तेवरों के बावजूद ओली ने दहल से मेलमिलाप का एक रास्ता खुला रखा है। बताया जाता है कि बैठक में ओली ने कहा कि अगर दहल अपना राजनीतिक दस्तावेज वापस ले लें, तो वे भी अपने दस्तावेज को वापस ले लेंगे। उसके बाद दोनों पक्ष एक साझा दस्तावेज पेश कर सकते हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने गेंद दहल के पाले में डाल दी है। अब अगर दहल ओली की बात मान लेते हैं, तो इसे उनका झुकना समझा जाएगा। इसका असर उनकी सियासी हैसियत पर पड़ेगा।

फिलहाल ओली और दहल दोनों नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सह-अध्यक्ष हैं। यहां के अखबार काठमांडू पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषक हरि रोका के हवाले से यह कहा गया है कि शनिवार को ओली ने यह साफ कर दिया कि अब वे पार्टी में दो अध्यक्षों की व्यवस्था के साथ चलने को तैयार नहीं हैं। यानी वो चाहते हैं कि दहल ये पद छोड़ दें और उनके लिए पार्टी में कोई और इंतजाम किया जाए। 

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के मुताबिक ओली का दस्तावेज बदले की भावना से भरा हुआ है। ओली ने जो व्यक्तिगत टिप्पणियां की हैं, वह पार्टी के एक बड़े हिस्से को  पसंद नहीं आया है। ये ध्यान दिलाया है कि ओली ने दहल के दस्तावेज को इल्जामों का पुलिंदा बताया, जबकि खुद अपने दस्तावेज में भी उन्होंने आरोप लगाने का काम ही किया है। अपने दस्तावेज के आखिर में ओली ने पार्टी के नेताओं से पार्टी की एकता कायम रखने के लिए काम करने की अपील की है। लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्होंने खुद इसकी राह मुश्किल बना दी है।

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