नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अब अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) की मदद स्वीकार करने का मन बना लिया है। इसका मतलब यह है कि उन्होंने इस बारे में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दो कम्युनिस्ट पार्टियों के एतराज को नजरअंदाज करने का फैसला किया है। जानकारों का कहना है कि अगर पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) अपने रुख पर अडिग रहीं, तो सत्ताधारी गठबंधन का टूट जाना तय है।
देउबा ने अब दो टूक कहा है कि एमसीसी से 50 करोड़ डॉलर की मदद लेने के लिए हुए समझौते की संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्होंने संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा से बात की है। देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों का कहना है कि ये मदद दक्षिण एशिया में चीन का प्रभाव रोकने की अमेरिकी कोशिश का हिस्सा है। इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उधर पिछले हफ्ते अमेरिका ने यह दो टूक चेतावनी दी थी कि अगर नेपाल ने ये मदद नहीं ली, तो वह नेपाल के साथ अपने द्विपक्षीय संबंध पर पुनर्विचार करेगा।
एमसीसी ने अनुमोदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 28 फरवरी की समयसीमा तय की हुई है। इसी बीच नेपाली कांग्रेस, माओइस्ट सेंटर और यूनिफाइट सोशलिस्ट पार्टियों ने अचानक संसद में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर राणा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश कर दिया है। यूएमएल ने इसका विरोध किया है। लेकिन यूएमएल ने अभी तक यह नहीं बताया है कि एमसीसी से हुए करार के अनुमोदन के लिए लाए गए प्रस्ताव पर उसका क्या रुख होगा।
अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाली कांग्रेस में ये आम राय बन गई है कि एमसीसी से मदद लेने की प्रक्रिया पूरी की जाए। पार्टी की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री राम शरण महत ने कहा कि एमसीसी करार का अनुमोदन न करना अमेरिका से विश्वासघात करना होगा। इसलिए इस बारे में बिना कोई अगर-मगर किए अनुमोदन का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने कहा है कि नेपाली कांग्रेस करार का अनुमोदन करने के प्रति वचनबद्ध है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब देखने की बात यह होगी कि इस पर माओइस्ट सेंटर और यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टियां क्या प्रतिक्रिया दिखाती हैं।