नेपाल में प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ने के पीछे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का गंभीर रूप से बीमार होना है। ओली पिछले काफी समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं और बुधवार को उनका किडनी ट्रांसप्लांट होना है। उन्हें महाराजगंज के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उधर युवराज खाटीवाड़ा ने तीन मार्च को नेशनल एसेंबली का अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद अपना इस्तीफा भेज दिया है और फिलहाल वित्त मंत्रालय खुद प्रधानमंत्री ओली ने अपने पास रखा है।
ओली के करीबी नेता बताते हैं कि इस बात की संभावना बन रही है कि प्रधानमंत्री ओली युवराज को फिलहाल कार्यवाहक वित्त मंत्री के तौर पर काम करने का मौका फिर से दे सकते हैं।
सदस्यता समाप्त होने के बाद भी अगले छह महीनों तक कोई मंत्री कार्यवाहक रह सकता है और इस दौरान उसे फिर से किसी न किसी सदन का सदस्य होने का मौका मिल सकता है। अगर युवराज दोबारा सदस्यता हासिल कर लेते हैं, तो उनके वित्त मंत्री बने रहने में कोई मुश्किल नहीं होगी।
कम्युनिस्ट पार्टी का एक बड़ा खेमा पार्टी के उपाध्यक्ष और तीन बार उपप्रधानमंत्री रह चुके बामदेव गौतम को सरकार में लाना चाहता है और इसके लिए पिछले हफ्ते प्रस्ताव पारित कर पार्टी ने गौतम के नाम पर मुहर लगा भी दी थी।
गौतम फिलहाल पुष्प कमल दहाल प्रचंड खेमे में हैं और खुलकर प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जता भी चुके हैं। 2017 का चुनाव हारने के बाद वो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पहले तक उन्हें ही प्रधानमंत्री का दावेदार माना जा रहा था। दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों को एक करने में भी बामदेव गौतम की बड़ी भूमिका मानी जाती है।