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ओली की कुर्सी जाएगी या सियासी गणित से बचा पाएंगे पीएम पद, आज होगा फैसला

Sat, 04 Jul 2020 02:33 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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भारत की जमीन पर नजर गड़ाने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की आंखों में खटकने लगे हैं। उनकी कुर्सी बचेगी या मौजूदा सियासी संकट से ओली पार पाएंगे इसका फैसला शनिवार को स्थायी समिति की बैठक में होगा। हालांकि ओली ने सरकार बचाने के लिए सियासी गणित बैठाना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के प्रचंड खेमे से बात बनी तो ठीक नहीं तो ओली पार्टी को तोड़कर विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस से गठजोड़ भी कर सकते हैं।
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ओली और प्रचंड खेमा शनिवार को स्थायी समिति की बैठक में पार्टी और सरकार के भविष्य पर फैसला करेंगे। समिति के सदस्य बिष्णु रीजल ने उम्मीद जताई है कि दोनों पक्ष बीच का रास्ता निकाल लेंगे और सरकार बच जाएगी। वैसे प्रचंड खेमे ने भारत विरोधी रुख और कई मोर्चों पर विफल रहने का आरोप लगाते हुए ओली से पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री दोनों पदों से इस्तीफा देने की मांग की है। इसमें पार्टी के कई दिग्गज नेता और पूर्वी पीएम भी प्रचंड के समर्थन में हैं। 

हालांकि बृहस्पतिवार को इस्तीफे पर आम सहमति नहीं बनने के बाद समिति की बैठक को शनिवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। वहीं ओली सरकार बचाने के लिए पार्टी भी तोड़ सकते हैं। ओली ने अपने समर्थकों को लेकर अलग हटने का इशारा बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति बिद्या देवी से मुलाकात के दौरान तब ही दे दिया था जब उन्होंने अध्यादेश लाकर राजनीतिक पार्टी कानून में संशोधन की बात कही थी। ओली के पास संसद में दो तिहाई बहुमत होने के बाद भी ओली ऐसी स्थिति में हैं कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है। 

44 सदस्यों वाली स्थायी समिति में 30 सदस्य ओली के खिलाफ हैं। ऐसे में अगर प्रचंड खेमे से बात नहीं बनने पर पार्टी तोड़ने की नौबत आती है तो ओली के पास 78-80 विधायकों का समर्थन होगा। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कुल 174 विधायकों में से 53 प्रचंड की ओर हैं और 43 ओली की तरफ। सत्ता में बने रहने के लिए ओली को 138 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। सूत्रों की मानें तो ओली की नेपाली कांग्रेस से बात हो गई और वह 63 विधायकों के साथ ओली का समर्थन कर सकती है।
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ओली का पैंतरा

नेपाल के मौजूदा राजनीतिक पार्टी कानून के तहत पार्टी तोड़कर अलग दल बनाने के लिए केंद्रीय समिति का 40 फीसदी या फिर पार्टी के 40 फीसदी विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। सूत्रों के मुताबिक नए अध्यादेश के जरिये ओली इसे 40 से घटाकर 30 फीसदी करने की फिराक में हैं।  इससे उनके लिए सत्ता बचाना आसान हो जाएगा।

भंडारी पर टिका दारोमदार

ओली की डूबती नैया को पार लगाने का दारोमदार अब राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी के ऊपर है। अगर वह ओली को अध्यादेश लाने का मौका दे देती हैं तो वह कानून बदलकर पार्टी को तोड़ कांग्रेस के समर्थन के साथ सरकार बचाने में कामयाब हो सकते हैं। संसद के सत्र को ओली ने पहले ही खत्म कर दिया है इससे उन्हें अविश्वास प्रस्ताव का सामना भी नहीं करना होगा। हालांकि नेकपा के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात कर अध्यादेश लाने की अनुमति नहीं देनी की मांग की है। अब देखना है कि भंडारी क्या फैसला लेती हैं।

ओली सरकार के खिलाफ मधेशियों का प्रदर्शन

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाल सरकार की नीतियों, नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ नेपाल के नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया है। सीमाई क्षेत्रों के मधेशी नागरिकों ने सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
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