नेपाल की राजनीति में बाहरी ताकतों के दखल की आशंका को गिरी स्वीकार करती हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से इसके पीछे चीन की राजदूत की भूमिका हो सकती है। मैं संसद में उन्हें और नेपाल में चीन की भूमिका पर सवाल उठाती रही हूं। आणविक हथियारों को लेकर जिस तरह नेपाल की संसद में बिल पारित हुआ था, उस पर भी मैंने सवाल उठाए थे। सीमा विवाद की बात करें तो नेपाल की जमीन जो चीन के कब्जे में है उसे लेकर भी मैंने सवाल उठाए थे।
गिरी कहती हैं कि इस समय अंतरराष्ट्रीय पटल पर चीन जिस तरह से घिरा हुआ है, वह चाहता है कि अपने आसपास एक सुरक्षित माहौल तैयार किया जाए। भारत भी चीन को लगातार जवाब दे रहा है और अमेरिका से साथ चीन के विवाद भी जगजाहिर हैं। ऐसे में नेपाल की राजनीति में एक देश की राजदूत का इतना दखल समझ नहीं आता है। इन सब मामलों पर उठाए गए सवाल भी इस कार्रवाई का कारण हो सकते हैं।
भारत और नेपाल के बीच नक्शे के विवाद पर गिरी ने कहा कि ये ऐसे मतभेद हैं जो बातचीत के जरिए निपटाए जा सकते हैं। यह देखना पड़ेगा कि दोनों देशों का नक्शा पहले क्या था और अब क्या है। ये ऐसे मामले हैं जो बातचीत की मेज पर ही सुलझ सकते हैं। संसद में मैंने नक्शा बदलने के लिए संविधान संशोधन में सुधार का प्रस्ताव रखा था। सरकार कह रही थी कि यह नया नक्शा नेपाल की वास्तविक सीमा के लिए लाया जा रहा है। यह अच्छा है। लेकिन नेपाल की वास्तविक सीमा क्या है?
इसे तय करने के लिए दस्तावेज होने चाहिए, कोई संधि होनी चाहिए। अगर आप किसी पुराने नक्शे को किसी नए नक्शे से बदलना चाहते हैं तो इसके पीछे कोई तार्किक आधार भी तो होना चाहिए। ये ऐसे फैसले हैं जो अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर बड़ा असर करते हैं और इन्हें केवल भावनाओं के आधार पर नहीं लिया जा सकता है। पहले सरकार इस संबंध में कुछ सुनने को तैयार नहीं थी, लेकिन अब इसे लेकर नौ सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस फैसले से साफ पता चलता है कि कहीं न कहीं कोई चूक तो हुई है।
गिरी ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा के दौरान नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी और चीन सरकार के बीच 16 सूत्रीय समझौता हुआ था। इसके बाद नेपाल की राजनीति में चीनी राजदूत की सक्रियता में खासा इजाफा देखने को मिला, जो आज भी जारी है। इस समझौते की धाराओं को पढ़ें तो साफ पता चलता है कि यह कोई विकास के लिए भागीदारी नहीं है बल्कि नेपाल की अंदरूनी राजनीति, यहां की नीतियां और चीन के साथ तालमेल बनाए रखने की कोशिशों की खोज भर है।
इस बारे में कई लोग सवाल उठा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि नेपाल का युवा भी इस बात को समझ रहा है और सवाल उठा रहा है। पहले जब कभी भारत की कोई गतिविधि होती थी तो हम जैसे लोग जो भारत और नेपाल के स्वस्थ संबंधों के पक्षधर हैं, आलोचना का शिकार होते थे। अब जब चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं तो यहां का युवा उस पर भी सवाल उठा रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल को स्वतंत्र और संप्रभु होना चाहिए और अपने फैसले स्वविवेक से लेने में समर्थ होना चाहिए।
गिरी ने आशंका जताई कि अगर समय रहते हम स्थितियों को नहीं समझे तो नेपाल आने वाले समय में उत्तरी कोरिया जैसा बन सकता है। अगर हमने अभी इसे नहीं रोका तो इस आशंका ने इनकार नहीं किया जा सकता है। सत्ताधारी पार्टी के अंदरूनी मतभेज देश के संसद सत्र पर असर डाल रहे हैं, जो बहुत गलत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से संसद का सत्र समाप्त किया गया उसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
गिरी कहती हैं कि बिना लोकतंत्र के मैं नहीं रह सकती है। मैं ऐसे किसी भी देश में नहीं रहना पसंद करूंगी, जहां लोकतंत्र नहीं है। वह कहती हैं कि अच्छी बात यह है कि नेपाल में लोग इस बारे में जागरूक हैं। अपनी व्यक्तिगत लड़ाई को लेकर गिरी ने कहा कि स्थिति का आकलन करने के बाद वह कोई कदम उठाएंगी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित है कि हम इस लड़ाई को यहीं नहीं रोकेंगे, बल्कि इसे आगे लेकर जाएंगे।