बढ़ते आर्थिक संकट के बीच नेपाल में बिजली निर्यात से भविष्य संवरने की उम्मीद जगी है। फिलहाल, आयात बिल बढ़ने के कारण देश का भुगतान संतुलन बिगड़ रहा है। नेपाल की अर्थव्यवस्था आयात पर निर्भर है। उसके विदेशी व्यापार में 90 फीसदी हिस्सा आयात का है, जबकि सिर्फ दस फीसदी हिस्सा निर्यात का है। लेकिन नेपाल के आर्थिक जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में ही ये सूरत बदल सकती है। इसकी वजह नेपाल से बिजली निर्यात की बढ़ रही संभावनाएं हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक बीते अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के बीच बिजली क्षेत्र में सहयोग पर बनी सहमति के बाद नेपाल से भारत को बिजली निर्यात करने की संभावना और मजबूत हुई। अब नेपाल में ये उम्मीद मजबूत हुई है कि जल्द ही वह भारत के अलावा दूसरे दक्षिण एशियाई देशों को भी बिजली का निर्यात कर सकेगा।
नेपाली मीडिया में छपी टिप्पणियों में कहा गया है कि जिस समय नेपाल विदेशी मुद्रा भंडार घटने से चिंतित है, वैसे मौके पर बिजली क्षेत्र में बेहतर हुई संभावनाओं से अच्छी खबर कोई और नहीं हो सकती थी। इस वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में नेपाल का व्यापार घाटा 268.26 अरब रुपये अधिक रहा है। इस अवधि में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 18.2 फीसदी की गिरावट आई है। अप्रैल के मध्य में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 9.61 बिलियन डॉलर ही रह गए थे।
इस गंभीर सूरत को देखते हुए देउबा सरकार ने अगले पांच वित्त वर्षों के अंदर व्यापार संतुलन बहाल करने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का कहना है कि ये लक्ष्य बिजली के संभावित निर्यात से होने वाली आय के अनुमान पर निर्भर हैं। एनईए के प्रबंध निदेशक कुलमान घीसिंग ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘बिजली विदेशी मुद्रा कमाने का एक बड़ा स्रोत बन सकती है। नेपाल के लिए बिजली निर्यात के बाजार के खुलने की अभी शुरुआत भर हुई है।’