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Nepal News: स्थानीय चुनाव के ट्रेंड में नेपाली कांग्रेस का उभार, माओइस्ट सेंटर की भी बची इज्जत, यूएमएल सबसे पीछे

Tue, 17 May 2022 02:41 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली यूएमएल पार्टी को 2017 में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। लेकिन सोमवार सुबह तक वह दूसरे नंबर पर थी। नेपाली कांग्रेस ने 290 से ज्यादा इकाइयों में बढ़त बना ली थी, जबकि वह 194 इकाइयों में ही आगे थी।
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नेपाल चुनाव की तस्वीर
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विस्तार
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नेपाल में पिछले शुक्रवार को हुए स्थानीय चुनाव के नतीजों से अब शुरुआती संकेत उभरने लगे हैं। शनिवार को शुरू हुई मतगणना बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अब तक जो संकेत हैं, वे आगे भी जारी रहे, तो संभव है कि इन चुनावों में सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी विजेता साबित होगी। जबकि उसके नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को अपनी पुरानी स्थिति बनाए रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। मुख्य विपक्षी पार्टी- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) को तगड़ा झटका लगने के संकेत हैं।  

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पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली यूएमएल पार्टी को 2017 में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। लेकिन सोमवार सुबह तक वह दूसरे नंबर पर थी। नेपाली कांग्रेस ने 290 से ज्यादा इकाइयों में बढ़त बना ली थी, जबकि वह 194 इकाइयों में ही आगे थी। यहां राजनीतिक विश्लेषकों में आम राय है कि अगले संसदीय चुनाव के लिहाज से स्थानीय चुनावों के परिणाम महत्त्वपूर्ण साबित होंगे। पिछले मौकों पर देखा गया है कि स्थानीय चुनावों में बढ़त पाने वाली पार्टी संसदीय चुनाव में भी सबसे बड़ा दल बन कर उभरती है।

राजनीतिक विश्लेषक झलक सुबेदी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘गठबंधन करना निश्चित रूप से कारगर साबित हुआ है। अगर गठबंधन नहीं हुआ होता, तो माओइस्ट सेंटर को उतनी सीटें भी नहीं मिल रही होतीं, जितनी ये पार्टी जीतती दिख रही है।’ नेपाली कांग्रेस ने इन चुनावों के लिए अपने नेतृत्व वाले राष्ट्रीय गठबंधन में शामिल दलों माओइस्ट सेंटर, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जन मोर्चा के साथ तालमेल किया था।
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सामाजिक और नीति संबंधी अनुसंधान करने वाली संस्था नॉर्थ साउथ कलेक्टिव्स के अध्यक्ष भास्कर गौतम ने कहा है- शुरुआती नतीजों से साफ है कि गठबंधन के कारण माओइस्ट सेंटर को अपनी जड़ें जमाने का मौका मिला है। उन्होंने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘नेपाली कांग्रेस माओइस्ट सेंटर की रक्षक बन कर उभरी है। हालांकि यह भी सच है कि माओइस्ट सेंटर और अन्य पार्टियों के समर्थन के कारण नेपाली कांग्रेस भी सबसे बड़ा दल बन कर सामने आ रही है। हालांकि नेपाली कांग्रेस के अंदर गठबंधन करने के सवाल पर गहरे मतभेद थे, लेकिन गठबंधन की वजह से पार्टी को अच्छे नतीजे मिले हैं।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन के पांचों दलों पूरा तालमेल सिर्फ लगभग एक तिहाई सीटों पर ही हो पाया। नेपाल ओपन यूनिवर्सिटी में राजनीतिक दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर खगेंद्र परसाई के मुताबिक अतीत में भी चुनावी गठबंधन से राजनीतिक दलों को फायदा होता रहा है। ऐसी ही इस बार भी हुआ है। उन्होंने कहा- ‘यह स्पष्ट है कि अगर देश भर में कारगर गठबंधन हुआ होता, तो माओइस्ट सेंटर को और लाभ होता, जबकि यूएमएल का प्रदर्शन और खराब रहता।’

काठमांडू पोस्ट के आकलन के मुताबिक अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहे, तो पिछली बार की तुलना में यूएमएल को 50 से ज्यादा स्थानीय इकाइयों का नुकसान होगा। पार्टी ने पहले दावा किया था कि इस बार उसका प्रदर्शन 2017 से भी बेहतर रहेगा। लेकिन रविवार शाम तक जब संकेत साफ होने लगे, तो पार्टी ने चुनावों में धांधली होने का आरोप लगा दिया। पार्टी के महासचिव शंकर पोखारेल ने कहा कि यूएमएल को वोटरों को मतदान से रोका गया, जबकि सत्ताधारी गठबंधन की पार्टियों के पक्ष में फर्जी वोट डाले गए। 

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