फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेपालः स्थानीय चुनावों की बेहदी धीमी मतगणना, अभी और लग सकता है हफ्ते भर का समय

Tue, 17 May 2022 02:41 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक 2008 के आम चुनाव में काठमांडू स्थित चुनाव क्षेत्र संख्या एक में ईवीएम का प्रयोग किया गया था। लेकिन बाद में इन मशीनों को अपनाने की कोशिश नहीं की गई।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नेपाल में स्थानीय चुनावों के लिए 13 मई को हुए मतदान की बेहद धीमी गति से चल रही मतगणना से देश में बेसब्री बढ़ने के संकेत हैं। मतगणना की रफ्तार इतनी धीमी है कि सारे नतीजे आने में अभी हफ्ते भर का और समय लग सकता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपालिया ने इसको लेकर देश को पहले ही आगाह कर दिया था। मतदान के एक दिन बाद उन्होंने कहा था कि मतगणना पूरी करने में दस दिन तक समय लग सकता है। हालांकि इसके पहले निर्वाचन आयोग ने दावा किया था कि पांच दिन में सारी गिनती पूरी कर ली जाएगी।

विज्ञापन


नतीजे जानने को बेसब्र लोगों की तरफ से अब पूछा जाने लगा है कि निर्वाचन आयोग अभी भी मतपत्रों से चुनाव कराने के पुराने तरीके में क्यों फंसा हुआ है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ताजा अनुभव के बाद अब संभावना है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के इस्तेमाल की मांग तेज हो जाएगी। देश में चुनाव संपन्न कराने से जुड़े रहे अधिकारी भी अब ऐसी राय जताने लगे हैं। पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी नीलकंठ उप्रेती ने मौजूदा मतदान प्रणाली के बारे में कहा है- ‘यह बहुत थकाने वाली और ऊबाऊ प्रक्रिया है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों, उनके समर्थकों, और मतदाताओं को उलझे रहना पड़ा है।’

उप्रेती ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘दुनिया में काफी तकनीकी प्रगति हो चुकी है, लेकिन हम चुनाव कराने के 18वीं सदी के तरीकों में फंसे हुए हैं। नेपाल में ऐसे विशेषज्ञ हैं, जो मतदान कराने के लिए जरूरी और विश्वसनीय सॉफ्टवेयर और मशीनें बना सकते हैँ।’
विज्ञापन


काठमांडू पोस्ट के मुताबिक 2008 के आम चुनाव में काठमांडू स्थित चुनाव क्षेत्र संख्या एक में ईवीएम का प्रयोग किया गया था। लेकिन बाद में इन मशीनों को अपनाने की कोशिश नहीं की गई। मीडिया रिपोर्टों में ध्यान दिलाया गया है कि पांच साल पहले स्थानीय चुनावों की मतगणना पूरी करने में 14 दिन लग गए थे। तब सरकार और निर्वाचन आयोग को इसे एक समस्या के रूप में देखते हुए इसके समाधान पर विचार करना चाहिए था। इस दिशा में कुछ चर्चा भी हुई। लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं हो सका।

तीन महीने पहले संचार और सूचना तकनीक मंत्रालय में संयुक्त सचिव अनिल कुमार दत्ता के नेतृत्व वाली एक समिति ने निर्वाचन आयोग के सामने एक रिपोर्ट रखी थी। उसमें कहा गया था कि ईवीएम के इस्तेमाल से कोई समस्या नहीं आएगी। उसमें भारत के अनुभव का जिक्र भी किया गया। इस आधार पर सिफारिश की गई कि नेपाल में भी इन मशीनों को अपनाया जा सकता है। 

बताया जाता है कि निर्वाचन आयोग में भी कई अधिकारी ईवीएम अपनाने के पैरोकार हैँ। उनमें निर्वाचन आयुक्त ईश्वरी प्रसाद पौडयाल भी हैं। मगर कई राजनीतिक दलों में इसको लेकर अब भी शक बना हुआ है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के वरिष्ठ नेता वर्षामन पुन ने कहा है- कई विकसित देश मशीनों का इस्तेमाल शुरू करने के बाद मतपत्रों की तरफ लौट गए। हमें अंदेशा है कि उन मशीनों से चुनाव में हेरफेर हो सकती है।

लेकिन अब मतगणना में हो रही देर के बीच कई राजनीति दलों की तरफ से भी इन मशीनों के पक्ष में आवाज उठने लगी है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने तो यहां तक कहा है कि वह हमेशा से ईवीएम के इस्तेमाल की समर्थक रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें