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ओली और प्रचंड के बीच समझौता कराने और पार्टी को टूटने से बचाने में जुटी एनसीपी

Thu, 09 Jul 2020 07:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
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KP sharma OLI and Pushp Kamal Dahal - फोटो : File Photo
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) ने अब प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली विरोधी प्रचार के लिए भारतीय मीडिया को दोषी ठहराया है। अपनी पार्टी के अंतर्विरोधों को सामने लाने वाले नेपाली अखबारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार छपने वाली खबरों को देखने की बजाय एनसीपी को अब इसमें भी भारत ही नजर आ रहा है।

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हाल ही में प्रधानमंत्री ओली ने खुलेआम एक समारोह में कहा था कि एक होटल में बैठकर कुछ भारतीय ताकतें उन्हें कमजोर करने और हटाने की साजिश रच रही हैं।

इसके बाद से उन्हीं की पार्टी के तमाम नेता उनके खिलाफ बोलने लगे थे। इससे पहले से भी पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड और माधव नेपाल जैसे तमाम नेता ओली विरोधी मुहिम खुलकर चला रहे थे।

लेकिन अब प्रचंड और ओली में समझौते की सूरत में इस विवाद को पाटने के लिए पार्टी ने एक बार फिर भारत विरोधी रुख जताकर लोगों को ये बताने की कोशिश की है कि पार्टी में सबकुछ ठीक है।
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पूर्व उप प्रधानमंत्री और सत्ताधारी एनसीपी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठा ने ट्वीट कर कहा है कि भारत, नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार को बदनाम करने का काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि नेपाल की एकता और संप्रभुता के सवाल पर पूरे देश की जनता एक है और हमारी पार्टी की जो भी समस्या है, उसे हल करना हमारा काम है।

विदेशी तत्वों की ओर से बांटो और राज करो की सियासत यहां नहीं चलेगी।  
 
गौरतलब है कि नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर चल रही कुर्सी की जंग कई महीने पुरानी है। एनसीपी की स्थाई समिति की बैठक लगातार टल रही है और प्रधानमंत्री ओली के साथ प्रचंड के समझौते की कोशिशें अब रंग ला रही हैं।

नेपाली मीडिया बार-बार ये खबरें छाप भी रहा है और दिखा भी रहा है। पार्टी के नेता ही इसकी पुष्टि भी करते हैं कि पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में कितने ओली विरोधी हैं और उनका इस्तीफा मांग रहे हैं।

ओली और प्रचंड खुद बार-बार अपने अंतर्विरोधों और कुर्सी को लेकर चल रही जंग को सार्वजनिक करते रहे हैं। ऐसे में एनसीपी का भारतीय मीडिया को निशाना बनाया जाना भी उनकी सियासत का ही एक हिस्सा माना जा रहा है।

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