नेपाल उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के अलावा वर्तमान में 13 वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के तहत नई सरकार बनाने का दावा पेश करने वाले नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा समेत भंग सदन के 146 सदस्यों ने भी उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर प्रतिनिधि सभा को फिर से बहाल करने की मांग की है।
वहीं, राष्ट्रपति भंडारी ने नई सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री ओली और विपक्षी गठबंधन के दो अलग-अलग दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दावे अपर्याप्त हैं। जबकि देउबा के एक वकील द्वारा नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की एकता और पंजीकरण की समीक्षा के मामले में संवैधानिक पीठ के सदस्यों के रूप में चुने गए दो न्यायाधीशों पर उनके पिछले फैसले पर सवाल उठाए जाने के बाद विवाद छिड़ गया।
संवैधानिक पीठ के गठन पर विवाद बढ़ने के बाद न्यायाधीश तेज बहादुर केसी और बाम कुमार श्रेष्ठ ने पीठ नहीं छोड़ने का फैसला किया जबकि दो अन्य न्यायाधीशों ने पीठ से बाहर निकलने का विकल्प चुना। इसने मुख्य न्यायाधीश राणा को सदन भंग के खिलाफ दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पीठ का पुनर्गठन करने को मजबूर किया।
इस बीच, विपक्षी गठबंधन ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी कर ओली सरकार द्वारा मंत्रिमंडल में फेरबदल करने की निंदा की। प्रधानमंत्री ओली ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल में फेरबदल किया। ओली के नए मंत्रिमंडल में तीन उप-प्रधानमंत्री, 12 कैबिनेट मंत्री और दो राज्य मंत्री हैं।