उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने चीन को एक 'सुरक्षा खतरा' बताया है। सैन्य संगठन ने बुधवार को कहा कि चीन ने नाटो को चुनौती दी है और उसके रूस के साथ घनिष्ठ संबंध पश्चिमी देशों के हितों के खिलाफ हैं। नाटो ने कहा कि वे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सिस्टेमिक कम्पीटिशन का सामना कर रहे हैं।
नाटो ने कहा कि चीन की महत्वकांक्षाएं और नीतियां हमारे हितों, सुरक्षा और मूल्यों को चुनौती देती हैं। चीन अपने ग्लोबल फुटप्रिंट और प्रोजेक्ट पावर को बढ़ाने के लिए राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला को नियोजित करता है जबकि अपनी रणनीति, इरादों और सैन्य निर्माण को लेकर अपारदर्शी रहता है।
नाटो ने चीन पर लगाया दुर्भावनापूर्ण हाइब्रिड और साइबर ऑपरेशन का आरोप
बयान में कहा गया है कि चीन और रूस के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कम करने की उनकी साझा कोशिशें हमारे मूल्यों और हितों के विपरीत हैं। नाटो ने कहा कि चीन के दुर्भावनापूर्ण हाइब्रिड और साइबर ऑपरेशन और इसकी टकराव संबंधी बयानबाजी और दुष्प्रचार सहयोगियों को निशाना बनाते हैं और गठबंधन (नाटो) की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाते हैं।
'प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों को नियंत्रित करना चाहता है चीन'
नाटो ने आगे कहा कि बीजिंग प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों और रणनीतिक सामग्री न आपूर्ति श्रृंखलाओं को नियंत्रित करना चाहता है।
संगठन ने कहा, हम सुरक्षा के लिए चीन द्वारा पेश की गई प्रणालीगत चुनौतियों का समाधान करने के लिए जिम्मेदारी से काम करेंगे और सहयोगियों को रक्षा और सुरक्षा की गारंटी देने के लिए नाटो की स्थायी क्षमता सुनिश्चित करेंगे।
'द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रहा नाटो'
स्पेन की राजधानी मेड्रिड में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन में महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि तीस देशों का सैन्य गठबंधन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर सुरक्षा संकट की चुनौती का सामना कर रहा है। गठबंधन के नेताओं ने रूस के आक्रमण का सामना कर रहे यूक्रेन के लिए राजनीतिक और व्यावहारिक समर्थन बढ़ाने का वादा किया।
इस बीच नाटो गठबंधन को बड़ा सैन्य हिस्सा प्रदान करने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन एक अचूक संदेश भेजेगा कि नाटो मजबूत और एकजुट है।