अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड अपने विभाग में कर्मचारियों की संख्या 40 फीसदी घटाएंगी। साथ ही राष्ट्रीय खुफिया विभाग के सालाना बजट में भी 70 करोड़ डॉलर से ज्यादा की कटौती करेंगी। इस संबंध में बुधवार को ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की। गबार्ड चाहती हैं कि खुफिया एजेंसियां छोटी हों और पैसे बचाएं। साथ ही राजनीति से हटकर सिर्फ सच्ची और जरूरी जानकारी देने पर ध्यान केंद्रित करें।
अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया विभाग (ODNI) के कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक गई है। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को घोषणा की है कि खुफिया विभाग अपने कर्मचारियों की संख्या 40 फीसदी घटाएगा। साथ ही अपने सालाना बजट में 70 करोड़ डॉलर से ज्यादा की कटौती करेगा।
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने एक बयान में कहा कि पिछले 20 वर्षों में विभाग का आकार बहुत बड़ा और अक्षम हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खुफिया एजेंसियों में सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। गुप्त जानकारी लीक की जाती है और राजनीति के लिए खुफिया सूचनाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
खुफिया समुदाय को जिम्मेदारी निभाने के लिए करने होंगे बदलाव
गबार्ड ने कहा कि खुफिया समुदाय को अमेरिकी लोगों और संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए गंभीर बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें अपने मूल मिशन पर ध्यान केंद्रित करना होगा, जिसमें सच्चाई का पता लगाना और राष्ट्रपति एवं नीति निर्माताओं को सही, निष्पक्ष और समय पर खुफिया जानकारी देना शामिल है।
पहले भी कई कार्यक्रम और एजेंसियां की गई हैं बंद
ये बदलाव उस बड़े प्लान का हिस्सा हैं, जिसमें ट्रंप प्रशासन अमेरिकी चुनावों पर विदेशी दखल के आकलन को लेकर नए सिरे से सोच रहा है। ट्रंप लंबे समय से इस नतीजे से नाराज रहे हैं कि रूस ने 2016 का चुनाव उनके पक्ष में प्रभावित किया था। इससे पहले भी प्रशासन ने चुनाव सुरक्षा पर काम करने वाले कई कार्यक्रम और एजेंसियां बंद या कमजोर की हैं। जैसे, फरवरी में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने एफबीआई की एक टीम को भंग कर दिया था जो चुनावों पर विदेशी असर की जांच कर रही थी। साइबर सुरक्षा एजेंसी का बजट भी घटाया गया है।