नासा लूनर मिशन के जरिए चंद्रमा पर इंसान भेजने से पहले एक परीक्षण कर रहा है। एजेंसी ने इससे पहले कहा था कि वह लॉन्चिंग में विफलता से निपटने के लिए फ्यूल भरने की प्रक्रिया में बदलाव कर रहे हैं।
अमेरिकी अंतरक्षित एजेंसी नासा शनिवार को लगातार दूसरी बार भी अपने नए लूनर मिशन को लॉन्च करने में विफल रहा। पहले प्रयास में भी इसी तरह इंजन में गड़बड़ी और फ्यूल लीक की समस्या सामने आ गई थी। जिसके बाद इस कार्यक्रम को रोक दिया गया था।
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नासा लूनर मिशन के जरिए चंद्रमा पर इंसान भेजने से पहले एक परीक्षण कर रहा है। एजेंसी ने इससे पहले कहा था कि वह लॉन्चिंग में विफलता से निपटने के लिए फ्यूल भरने की प्रक्रिया में बदलाव कर रहे हैं। उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि सोमवार के नाकाम परीक्षण की वजह एक खराब सेंसर रहा होगा।
यह नासा का बनाया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट 322 फुट (98 मीटर लंबा) है। यह केनेडी स्पेस सेंटर में अपने लॉन्च कंट्रोल पर है और इसके टॉप पर मौजूद क्रू कैप्सूल खाली है।
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नासा ने बताया था कि उसका स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट कैप्सूल को चंद्रमा के आसपास पहुंचाने की कोशिश करेगा और इसके बाद वापस आ जाएगा। कैप्सूल में कोई भी सवार नहीं होगा और परीक्षण के लिए सिर्फ तीन पुतले रखे होंगे। यदि यह लॉन्चिंग सफल रही तो यह 50 साल पहले नासा के अपोलो कार्यक्रम के बाद से चंद्रमा पर जाने वाला पहला कैप्सूल होगा।
नासा, चंद्रमा के चारों ओर रॉकेट के ऊपर क्रू कैप्सूल भेजना चाहता है, वह इसे अंतरिक्ष यात्रियों के अगली उड़ान पर पहुंचने से पहले सतह पर पहुंचाना चाहता है। यदि परीक्षण सफल होता है तो अंतरिक्ष यात्री 2024 में चंद्रमा के चारों ओर उड़ सकते हैं औऱ 2025 में उस पर उतर सकते हैं।