फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्राउंड जीरो पर अमर उजाला: जिस नाहल ओज गांव में लहलहाती थी फसलें, अब वहां बचे हैं केवल तबाही के निशान

सार

इस्राइल की राजधानी तेल अवीव से महज एक घंटे की दूरी पर व गाजा पट्टी की सीमा से सटे इस गांव में कभी साढ़े चार सौ लोगों की आबादी हुआ करती थी। गाजा पट्टी की सीमा से बिल्कुल सटे हुए इस गांव में हमले तो पहले भी होते थे, लेकिन पिछले साल सात अक्तूबर को जो हुआ उसने इस गांव को पूरी तरह से खत्म कर दिया।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गाजापट्टी बॉर्डर से बिल्कुल सटा हुआ इलाका है नाहल ओज। यह वह गांव है जहां पर हमास के आतंकियों ने सबसे ज्यादा बर्बरता की थी। यहां के लोगों को हमास ने सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग करके मारा था। अमर उजाला जब गाजा पट्टी के इस किब्बुत (खेतों के बीच में बसी हुई बहुत छोटी सी आबादी वाले गांव) में पहुंचा तो यहां हर तरफ सिर्फ सन्नाटा दिखाई दिया। हालांकि इस्राइली सैनिकों की इस इलाके में जबरदस्त मौजूदगी है।

विज्ञापन


इस किब्बुत से ताल्लुक रखने वाले एलोन बताते हैं कि गांव में घुसकर हमास की बर्बरता को लोग अब तक नहीं भूल पाए हैं। खास तौर से सोशल मीडिया पर अपनों की मौत की लाइव स्ट्रीमिंग देखने वाले लोग अब भी खौफ में जी रहे हैं। एलोन ने हमें गांव के वो घर भी दिखाएं यहां पर सामूहिक नरसंहार हुआ था। उन्होंने बताया कि इस छोटे से किब्बुत में रहने वाले लोग ज्यादातर खेती ही करते थे, यहां खेतों में फसलें लहलहाती थीं लेकिन अब हर तरफ सिर्फ तबाही के निशान नजर आते हैं।

60 से ज्यादा सैनिकों की हुई थी हत्या
इस्राइल की राजधानी तेल अवीव से महज एक घंटे की दूरी पर व गाजा पट्टी की सीमा से सटे इस गांव में कभी साढ़े चार सौ लोगों की आबादी हुआ करती थी। गाजा पट्टी की सीमा से बिल्कुल सटे हुए इस गांव में हमले तो पहले भी होते थे, लेकिन पिछले साल सात अक्तूबर को जो हुआ उसने इस गांव को पूरी तरह से खत्म कर दिया। इसी गांव में इस्राइली सेना के 60 से ज्यादा सैनिकों को भी हमास के लोगों ने मौत के घाट उतार दिया था। साथ ही कुछ लोगों का अपहरण कर गाजा ले जाकर भी खत्म किया गया। नाहल ओज गांव के कई लोग अब भी हमास की कैद में ही हैं।
विज्ञापन


आम नागरिकों के जाने पर है पाबंदी  
गाजा पट्टी से बिल्कुल लगे होने के चलते इस पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। साथ ही आम नागरिकों के इस रास्ते पर जाने की पूरी तरह से मनाही है, लेकिन अमर उजाला विशेष अनुमति से यहां पहुंचा था। यहां हमने हर तरफ पसरे सन्नाटे के बीच उस तबाही को भी महसूस किया जो पिछले साल हमास ने मचाई। मौके पर मौजूद सेना के जवानों ने बताया कि पहले से ही यहां पर आईडीएफ (इस्राइल डिफेंस फोर्स) का एक बड़ा बेस कैंप है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें