हाल ही में यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) ने अहमद तलिप नाम के एक उइगर मुस्लिम को वापस चीन भेज दिया। चीन ने उसे प्रत्यर्पित करने की मांग की थी। कई और उइगर मुसलमानों पर ऐसी ही कार्रवाई मिस्र, सऊदी अरब और यूएई ने की है। ये बात अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक खोजी रिपोर्ट से सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि 2017 के बाद से सिर्फ मिस्र से प्रत्यर्पण के ऐसे कम से कम 20 मामले हुए हैं। सीएनएन के मुताबिक उसने इस बारे में मिस्र, यूएई और सऊदी अरब की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। मिस्र से हुए प्रत्यर्पणों के बारे में मिस्र या चीन ने कोई सार्वजनिक जानकारी भी नहीं दी है।
मिस्र से जिन लोगों को वापस चीन भेजा गया, उनमें ज्यादातर वहां मशहूर अल-अजहर यूनिवर्सिटी में छात्र थे। उनके अलावा बड़ी संख्या में उइगर लोगों को मिस्र में हिरासत में रखा गया है। सऊदी अरब से ऐसे प्रत्यर्पण के कम से कम एक मामले की पुष्टि हुई है। वहां हज के लिए आए एक व्यक्ति को हज पूरा करने के बाद हिरासत में लिया गया और उसे वापस चीन भेज दिया गया। इन मुस्लिम देशों ने उन उइगर मुसलमानों के परिजनों की इस आशंका बावजूद ये कार्रवाई की कि वापस चीन जाने पर उनका उत्पीड़न किया जाएगा। गौरतलब है कि शिनजियांग में कुछ वर्ष पहले कई आतंकवादी हमले हुए थे। उन्हीं से जुड़े मामलों में चीन को शिनजियांग से भागे कई लोगों की तलाश रही है।
सीएनएन ने कहा है कि मुस्लिम देशों की इस कार्रवाई के पीछे इस क्षेत्र में चीन का बढ़ रहा प्रभाव है। इस रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि 2019 में एक दर्जन से अधिक मुस्लिम बहुल देशों ने शिनजियांग प्रांत में चीन की नीति की सार्वजनिक तारीफ की थी। बाद में जब पश्चिमी देश शिनजियांग में उइगर मुसलमानों के कथित दमन का मामला संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद में ले गए, तो 37 देशों ने वहां चीन का साथ दिया। उनमें कई मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश भी थे।
रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि 2020 में यूएई के बीजिंग स्थित राजदूत ने शिनजियांग प्रांत का दौरा किया था। उसके बाद उन्होंने ने वहां लागू की जा रही नीतियों के समर्थन में खुला बयान दिया था। राजदूत अली अल-धाहेरी ने कहा था कि शिनजियांग में चीन जिस सकारात्मक योजना और दृष्टि के साथ चल रहा है, उससे वे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा था कि चीन शिनजियांग की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भूमिका बढ़ाना चाहता है। साथ ही वह वहां के लोगों का जीवन स्तर सुधारना चाहता है।
जबकि पश्चिमी देश और पश्चिम मानव अधिकार संगठन शिनजियांग में चीन की नीतियों की जबरदस्त आलोचना करते रहे हैं। मानव अधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच की अनुसंधानकर्ता माया वांग आरोप लगाया है कि यूएई, सऊदी अरब और मिस्र जैसे तानाशाही व्यवस्था वाले देशों ने अपने यहां उइगर मुसलमानों के साथ जो व्यवहार किया, वह संयुक्त राष्ट्र की यातना के खिलाफ संधि का उल्लंघन है। जबकि ये सभी देश उस संधि पर दस्तखत कर चुके हैं।
पश्चिमी मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को अंदेशा है कि जैसे- जैसे चीन का वैश्विक प्रभाव बढ़ेगा, पश्चिम एशिया और दूसरे इलाकों के देश उइगर मुसलमानों ‘दमन’ को हरी झंडी देते जाएंगे। उनके मुताबिक पश्चिमी देशों में इस मुद्दे पर चीन के खिलाफ बने माहौल का उस इलाके के देशों पर कोई असर नहीं हो रहा है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि उइगर मुसलमान तुर्क मूल के हैं, लेकिन अब टर्की ने भी चीन उनके कथित दमन के खिलाफ अपनी आवाज धीमी कर दी है।