म्यांमार में सैनिक शासन के आदेश के कारण मोबाइल डाटा का मूल्य बीते दो महीनों में बढ़ कर दोगुना हो गया है। टीवी चैनल अल-जजीरा की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरनेट शुल्क लगातार बढ़ने का असर म्यांमार के आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। इसके अलावा एक शिकायत यह भी है कि इंटरनेट की स्पीड पूरे देश में घटा दी गई है।
इंटरनेट डाटा को महंगा करने की शुरुआत बीते दिसंबर में हुई। तब सरकार ने सभी डाटा प्लान के दाम बढ़ाने का आदेश इंटरनेट सेवादाता कंपनियों को दिया। अब म्यांमार में एक जीबी डेटा के लिए एक डॉलर खर्च करना पड़ रहा है। जबकि पहले इसके लिए आधा डॉलर के बराबर रकम चुकानी पड़ती थी। इंटरनेट सेवाओं को महंगा बनाने के लिए सैनिक शासन ने जनवरी में एक और कदम उठाया। उसने मोबाइल और फिक्स्ड लाइन इंटरनेट की सेवा देने वाली कंपनियों पर कॉरपोरेट टैक्स बढ़ा कर तीन गुना कर दिया। इससे ये कंपनियां अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो गईं। इसके बाद सरकार ने एक और आदेश जारी किया, जिसके तहत विक्रताओं के लिए सिम कार्ड बेचते वक्त 11 डॉलर की एक्टिवेशन फीस लेना जरूरी कर दिया गया।
इसके अलावा सैनिक शासन ने साइबर सुरक्षा के कानून को भी और सख्त बनाने की पहल भी की है। इसके तहत देश में वीपीएन के इस्तेमाल को अवैध कर दिया जाएगा। वीपीएन का इस्तेमाल अकसर ब्लैकलिस्ट की गई वेबसाइटों और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बनाने के लिए किया जाता है। अभी ये प्रावधान कानून का हिस्सा नहीं बने हैं, लेकिन आरोप है कि अभी से इन पर अमल शुरू कर दिया गया है।
इंटरनेट स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली संस्था एक्सेसनॉ के म्यांमार प्रतिनिधि वाइ फियो म्यिंत ने अल-जजीरा से कहा कि इंटरनेट सेवाओं को महंगा करने और साइबर सुरक्षा के कानून को सख्त करने की पहल से म्यांमार में सभी लोगों को दिक्कत हो रही है। उनमें वे लोग भी हैं, जो लोकतंत्र बहाली आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा- ‘ये कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं कि देश की बहुसंख्यक जनता के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करना संभव ना रह जाए।’