दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन 'आसियान' में म्यांमार के सैनिक शासक अब अलग-थलग पड़ गए हैं। पिछले महीने आसियान देशों ने अपने शिखर सम्मेलन से म्यांमार के सैनिक शासक मिन आंग हलायंग को बाहर रखा था। इस हफ्ते आसियान की यूरोपियन यूनियन (ईयू) और चीन के साथ हुई वर्चुअल शिखर बैठकों में भी हलायंग को शामिल नहीं किया गया।
विश्लेषकों का कहना है कि आसियान के गठन के बाद पहली बार किसी सदस्य देश को इस संघ ने इस तरह दंडित किया है। पिछले 26 से 28 अक्तूबर तक हुए आसियान शिखर सम्मेलन के लिए आसियान ने म्यांमार से किसी गैर-राजनीतिक प्रतिनिधि को भेजन को कहा था। लेकिन म्यांमार ने उससे इनकार कर दिया। नतीजतन, उस शिखर बैठक में म्यांमार भाग नहीं ले सका।
आसियान नेताओं ने ये कदम सैनिक शासन की जिद के कारण अपनाया। आसियान ने सैनिक शासकों से कहा था कि वे आसियान के प्रतिनिधि को नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता आंग सान सू ची और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों से मिलने दे। म्यांमार की सेना ने इस साल एक फरवरी को इन निर्वाचित प्रतिनिधियों का ही तख्ता पलटा था। तब से उन्हें जेल में रखा गया है। विश्लेषकों के मुताबिक, सैनिक शासकों के इस रुख को देखते हुए आसियान नेताओं ने म्यांमार को अलग-थलग करने की रणनीति अपनाई है।
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने एक खबर के मुताबिक चीन ने आसियान नेताओं से कहा था कि उसके साथ शिखर बैठक में हलायंग को भाग लेने दिया जाए। ये बैठक 22 नवंबर को हुई। लेकिन चीन की इस लॉबिंग का इंडोनेशिया, ब्रूनेई, मलेशिया और सिंगापुर ने कड़ा विरोध किया। आखिरकार हलायंग को शिखर बैठक में जगह नहीं मिल सकी।
अब अगले साल कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन आसियान की अध्यक्षता संभालेंगे। इस भूमिका में म्यांमार के प्रति उनका क्या रोल रहेगा, इसको लेकर म्यांमार में कयास लगाए जा रहे हैँ। कंबोडिया के चीन से निकट रिश्ते हैं। म्यांमार में सैनिक शासन के विरोधियों को अंदेशा है कि वे चीन के प्रभाव में आकर सैनिक शासकों के प्रति नरम रुख अपना सकते हैँ। ऐसी ही आशंका कई आसियान देशों को भी है।
मलेशिया के सांसद और आसियान सांसदों की मानव अधिकार समिति के अध्यक्ष चार्ल्स सांतियागो ने कहा है- ‘नरसंहार के आरोपी सैनिक शासकों को वैधता दिलाने की चीन की कोशिश आसियान के लिए एक चुनौती है।’ उन्होंने कहा कि सैनिक शासकों को अलग-थलग रखने की नीति पर आसियान को कायम रहना चाहिए। इसके बदले उसे उसे नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एयूजी) के साथ बातचीत शुरू करनी चाहिए। एनयूजी का गठन म्यांमार के निर्वाचित सांसदों, नस्लीय अल्पसंख्यक संगठनों और सैनिक शासन के विरोधी गुटों ने किया है।
आसियान ने म्यांमार के सैनिक शासन से कहा था कि आसियान के शिखर सम्मेलन और ईयू और चीन के साथ उसकी शिखर बैठकों में वह गैर-राजनीतिक प्रतिनिधि भेजे। लेकिन सैनिक शासकों ने इससे इनकार कर दिया। बताया जाता है कि सैनिक शासकों ने ऐसा आसियान के रुख पर अपना विरोध जताने के लिए किया। सैनिक शासकों की राय है कि आसियान देश इस संघ की स्थापना के समय तय हुए सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहे हैँ। इनमें एक प्रमुख सिद्धांत यह था कि आसियान किसी सदस्य देश के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा।