यूक्रेन पर ईरानी ड्रोन से हमले
- फोटो : Social Media
रूस और यूक्रेन के बीच जंग खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। पुतिन की सेना आए दिन आक्रामक होती जा रही है और चुन-चुनकर यूक्रेनी शहर में तबाही मचा रही है। इस बीच सैन्य विश्लेषकों ने जो खुलासा किया है वह यूक्रेन के लिए चिंता का विषय जरूर है लेकिन इसका असर दोनों देशों के बीच हो रहे युद्ध पर नहीं पड़ने वाला है। दरअसल, सैन्य विश्लेषकों ने बताया है कि रूस की मदद के लिए अब ईरान अपने ड्रोन भेज रहे हैं जिनका उपयोग यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमले करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन ये ड्रोन बुनियादी ढांचों को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हैं लेकिन युद्ध के परिणाम पर इसका कोई असर नहीं होने वाला है।
ईरान ने युद्ध में खुल कर रूस का समर्थन किया
ईरान उन देशों में है, जिसने इस युद्ध में खुल कर रूस का समर्थन किया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान ने यह रुख अपने दीर्घकालिक सुरक्षा और कूटनीतिक हितों को साधने के लिए अपनाया है। इस खबर से दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरत हुई है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध में बढ़त बनाने के लिए ईरान में बने हथियारों का इस्तेमाल करने का फैसला किया। इसके पहले रूस ऐसा सीरिया में भी कर चुका है। सीरिया के गृह युद्ध में रूस ने वहां के राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन किया है।
ईरानी ड्रोंस से रूस को बड़ी मदद मिली
विशेषज्ञों ने कहना है कि जहां ईरानी ड्रोंस से रूस को बड़ी मदद मिली है, वहीं ईरान से सहायता लेकर रूसी राष्ट्रपति पुतिन अपने राष्ट्रीय हित साधने में ईरान के सहायक बने हैं। 1979 में देश में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान के अमेरिका से शत्रुतापूर्ण संबंध रहे हैं। ईरान अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मकसदों को हासिल करने में अमेरिका को सबसे बड़ी रुकावट मानता रहा है।
रूस ने कई ड्रोन ईरान से खरीदे
ईरान के कम लागत से बने लेकिन युद्ध कुशल ड्रोन पहले से चर्चित रहे हैं। अब रूस इनके लिए एक नया बड़ा बाजार बन गया है। रूसी अधिकारी शाहेद-129 और शाहेद-191 नाम के इन ड्रोन के संचालन की ट्रेनिंग लेने ईरान गए थे। इनके अलावा रूस ने शाहेद-136 और मोहाजेर-6 ड्रोन भी ईरान से खरीदे हैं। अब वह इनका इस्तेमाल यूक्रेन पर हमला करने में कर रहा है।
ईरानी नेतृत्व को उम्मीद है कि रूसी हमलों में ईरानी ड्रोन की कुशलता साबित होने के बाद कई दूसरे देश भी इन्हें खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं। विशेषज्ञों ने भी कहा है कि रूस दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। इसके बावजूद अगर उसने ईरान से हथियार खरीदे हैं, तो इससे ईरान के अस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा मिलेगी।