परंपरा की अनदेखी करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपनी सात देशों की यात्रा शुरू कर दी है। रवायत यह है कि अमेरिका में चुनाव में हारने के बाद निवर्तमान प्रशासन के विदेश मंत्री अगर विदेश जाते हैं, तो इससे पहले निर्वाचित राष्ट्रपति को भरोसे में ले लेते हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार मानने से इनकार कर दिया है। पोम्पियो खुद कह चुके हैं कि सत्ता का हस्तांतरण दूसरे ट्रंप प्रशासन के हाथों में होगा। इसलिए विदेश यात्रा से निकलने के पहले उनके मंत्रालय ने निर्वाचित राष्ट्रपति से कोई संपर्क नहीं किया। अमेरिका का विदेश मंत्रालय बाइडेन की टीम से सहयोग नहीं कर रहा है।
फ्रांस यात्रा से संबंधित जानकारी बाइडेन को देगा
पोम्पियो की यात्रा का पहला ठिकाना बने फ्रांस ने ये साफ कर दिया है कि वह बाइडेन की टीम से संपर्क में रहेगा और यात्रा के दौरान हुई तमाम बातचीत की जानकारी उसे देगा। फ्रांस के विदेश नीति विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि ये यात्रा एक अजीब हालत में हो रही है।
दुनिया के ज्यादातर देशों ने तीन नवंबर को हुए चुनाव में अमेरिका में आए जनादेश को मान लिया है। ज्यादातर देशों के नेताओं ने निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडेन को बधाई दे दी है। लेकिन ट्रंप प्रशासन और उनकी रिपब्लिकन पार्टी ऐसा करने से इनकार कर रही हैं।
सोमवार को फ्रांस के राष्ट्रपति से मुलाकात
पोम्पियो की यात्रा का मकसद चीन और ईरान के खिलाफ ट्रंप प्रशासन के सख्त रुख के लिए समर्थन जुटाना है। इस यात्रा के दौरान पोम्पियो पश्चिमी किनारे में उन बस्तियों में भी जाएंगे, जो फिलस्तीन के इलाके पर इजराइल ने बसाई हैं। इसके पहले अमेरिका के किसी विदेश मंत्री ने वहां की यात्रा नहीं की थी।
फ्रांस में सोमवार को उनकी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात होगी। मैक्रों के दफ्तर ने कहा है कि ये बातचीत निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन की टीम के साथ पूरी पारदर्शिता बरतते हुए की जाएगी। फ्रांस और जर्मनी सहित कई दूसरे यूरोपीय देशों के साथ ट्रंप प्रशासन के संबंध समस्याग्रस्त रहे हैं। ईरान से परमाणु समझौता तोड़ने और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस संधि से अमेरिका को अलग करने के राष्ट्रपति ट्रंप के रुख से ये देश खफा रहे हैं।
तुर्की, जॉर्जिया और कतर समेत अन्य देशों का दौर करेंगे पोम्पियो
फ्रांस के बाद पोम्पियो तुर्की, जॉर्जिया, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब जाएंगे। इन सभी देशों के नेता जो बाइडेन को जीत की बधाई दे चुके हैं। तुर्की, जॉर्जिया और कतर के नेताओं से राष्ट्रपति ट्रंप के संबंध वैसे भी बहुत मधुर नहीं रहे।
खासकर तुर्की से ट्रंप प्रशासन तब नाराज हो गया था, जब तुर्की ने रूस से मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने का फैसला किया। खबरों के मुताबिक टर्की यात्रा के दौरान पोम्पियो की तुर्की सरकार के नेताओं से मिलने का कार्यक्रम नहीं है। इसके बदले वे वहां धार्मिक नेताओं से मिलेंगे और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर उनसे बातचीत करेंगे।
फिलस्तीनी नेताओँ ने यात्रा की निंदा की
पश्चिमी किनारे की यात्रा के दौरान उनकी फिलस्तीनी नेताओं से बातचीत का कार्यक्रम नहीं है। फिलस्तीनी नेताओं ने पोम्पियो की इस यात्रा की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि जमीन कब्जा कर बनाई गई बस्तियों में जाकर पोम्पियो उन बस्तियों को मान्यता देने की खतरनाक मिसाल कायम कर रहे हैं।
पोम्पियो ने कहा कि मैं विदेश मंत्री हूं। मुझे दुनिया भर से फोन आ रहे हैं। वे लोग हमारे चुनाव पर नजर रखे हुए हैं। वे समझते हैं कि हमारी एक कानूनी प्रक्रिया है। वे समझते हैं कि इसे पूरा होने में वक्त लगेगा। लेकिन उनकी इन बातों को विदेशों में स्वीकार जा रहा है, ऐसा नहीं लगता।
फ्रांस के विदेश मंत्री ली दरियां एक हफ्ते पहले ही यह कह चुके हैं कि वे यूरोप- अमेरिका संबंधों के मामले में नए अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी टीम के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने जोर दिया कि इन संबंधों को फिर से वापस पाने की जरूरत है।