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वैक्सीन : अमेरिका और जापान का टीका संक्रमण रोकने में 90 फीसदी कामयाब, चीन से आगे निकले दोनों देश

Sun, 15 Nov 2020 03:07 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

  • अमेरिका और जर्मनी वैक्सीन बनाने की दौड़ में चीन से आगे निकले
  • चीन ने बढ़ाया अपने वैज्ञानिकों पर जल्दी टीका बनाने का दबाव  
  • चीन ने 60 देशों को जल्दी टीका उपलब्ध कराने का किया है वादा
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
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विस्तार
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ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की होड़ में फिलहाल चीन पिछड़ गया है। अमेरिकी कंपनी फाइजर और जर्मनी की फर्म बायो-एनटेक एसई ने इस हफ्ते एलान कर दिया कि उन्होंने जो टीका तैयार किया है, वो कोविड-19 संक्रमण रोकने में 90 फीसदी तक कामयाब हैं।

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पहले ये अंदाजा लगाया गया था कि इस होड़ में बाजी चीन मारेगा। मगर अमेरिकी और जर्मन कंपनियों ने उससे पहले घोषणा कर दी, जिससे दुनिया भर में इन कंपनियों के शेयर भाव में भारी उछाल आया है। अब जानकारों का कहना है कि चीन तभी दुनिया में अपना प्रभाव बना सकता है, अगर वह ये साबित करने की स्थिति में हो कि उसका टीका ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा प्रभावी है।

स्वास्थ्य देखभाल और जीवन विज्ञान के विशेषज्ञ शियाओछिंग लु बायोटन ने यहां कहा कि चीन का टीका क्लीनिकल परीक्षण के आखिरी दौर में है। लेकिन अब चीन को ये आम धारणा बनानी होगी कि उसका टीका सबसे ज्यादा सुरक्षित है।
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चीन के सामने छवि सुधारने की चुनौती
चीन सबसे पहले टीका पेश करे, इस कोशिश में उसने काफी ताकत झोंकी है। कोरोना वायरस सबसे पहले चीन के ही वुहान में सामने आया था। चीन ने उसके फैलाव पर प्रभावी ढंग से काबू पा लिया, लेकिन वायरस के बारे में आरंभिक जानकारी छिपाने को लेकर उसकी दुनिया भर में कड़ी आलोचना हुई।

तब से चीन इस कोशिश में जुटा रहा है कि इस महामारी को रोकने का वैक्सीन सबसे पहले वही पेश करे ताकि वह अपनी खोई छवि को वापस पा सके। चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अब भी ऐसा कर सकेगा, क्योंकि उसने अपना वैक्सीन गरीब देशों को आसानी से उपलब्ध कराने की योजना का एलान कर रखा है।

हमारी वैक्सीन से दुनिया की भलाई- चीन
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की एक बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि चीन की वैक्सीन दुनिया की भलाई के लिए होगा। तब चीन वैक्सीन तैयार करने की डब्लूएचओ की साझा कोशिश का भी हिस्सा बन गया था।

इसके बावजूद चीनी वैक्सीन बनाने के तरीकों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। चीन स्थित यूरोपीय संघ के राजदूत निकोलस चैपियस ने एक अखबार से बातचीत में डब्लूएचओ की कोशिश का हिस्सा बनने के लिए चीन की तारीफ की, लेकिन कहा कि वैक्सीन के वितरण, मूल्य और उसे अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र मिलने को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं। प्रमाणित होने के लिए सैंपल अभी तक नहीं दिए गए हैं, जबकि ऐसा करना जरूरी होता है।

चीन ने 60 से ज्यादा देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का वादा किया है। इनमें ज्यादातर वे देश हैं, जिन्हें चीन ने अपनी बेल्ट एंड रोड योजना के तहत कर्ज दे रखा है। इन देशों में इंडोनेशिया, बांग्लादेश, और पाकिस्तान भी शामिल हैं। कई लैटिन अमेरिकी और कैरीबियाई देश भी इनमें शामिल हैं। चीन ने इन देशों को एक अरब डॉलर का अतिरिक्त कर्ज देने का वादा किया है, ताकि वो वैक्सीन खरीद सकें।

अमेरिकी कंपनी फाइजर से संपर्क कर रहे हैं एशिया के कई देश
लेकिन फिलहाल सूरत यह बनी है कि एशिया के बहुत से देश फाइजर कंपनी से संपर्क कर रहे हैं। चीन की कंपनियां भी फाइजर से करार करने का इरादा दिखा रही हैं। इस संबंध में चीन के ड्रग रेगुलेटर ने शंघाई फोसुन फार्मास्यूटिकल ग्रुप कंपनी की अर्जी को स्वीकार भी कर लिया है। इस कंपनी ने फाइजर से मिलकर साझा परीक्षण करने की अनुमति मांगी है, ताकि फाइजर का वैक्सीन चीन के लोगों को भी उपलब्ध हो सके।

इस बीच टीका बनाने में जुटी चीन की कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है कि वो जल्द से जल्द अपना सारा डेटा प्रकाशित कर दें, ताकि समकक्ष वैज्ञानिक उसकी समीक्षा कर सकें। जानकारों का कहना है कि चीन की कंपनियां ऐसी सूचनाएं सार्वजनिक करेंगी, तभी दुनिया उनके टीके पर भरोसा करेगी।

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