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ऑस्ट्रेलिया: देश के कई हिस्सों में चूहों का तांडव, प्लेग फैलने से रोकने के लिए इन्हें जहर देकर मारेगी सरकार

Tue, 25 May 2021 02:32 PM IST
प्रियंका तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, कैनोविंद्रा

सार

चूहों की बढ़ती संख्या की वजह से ऑस्ट्रेलिया के कई क्षेत्र भयावह स्थिति का सामना कर रहे हैं। सरकार चूहों को मारने के लिए ब्रोमेडिओलोन नामक रसायन का प्रयोग करने जा रही है, जिसके खिलाफ पर्यावरणविदों ने चिंता व्यक्त की है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सारी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है। सभी का ध्यान इस महामारी को खत्म करने की ओर लगा हुआ, लेकिन ऑस्ट्रेलिया कोरोना के साथ ही एक और परेशानी से जूझ रहा है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में आजकल लाखों चूहों ने किसानों, व्यापारियों, गृहणियों व आमजन को परेशान करके रखा हुआ है। देश में इनकी आबादी हद से ज्यादा बढ़ने से अब लोगों की जान तक खतरे में पड़ गई है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया के उपप्रधानमंत्री ने इसी सप्ताह घोषणा की है कि वह चूहों से होने वाली प्लेग की बीमारी की रोकथाम के लिए अब उन्हें जहर देकर खत्म करने की योजना बना रही है।

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चूहों से हो रहा भारी नुकसान
ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी हिस्सों में खासकर न्यू साउथ वेल्स के बड़े हिस्से में प्लेग चूहों की काफी तादाद बढ़ गई है। ऐसे में सरकार ने इन्हें जहर देने की योजना बनाई है, ताकि इनसे प्लेग लोगों में न फैले। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक ये चूहे सैकड़ों लोगों को काट चुके हैं, जिसकी वजह से कई लोग प्लेग का शिकार हो चुके हैं। लोगों के लिए ये चूहे किसी आपदा से कम नहीं है। आपको बता दें कि पिछले कई महीनों से चूहों ने दक्षिण में विक्टोरिया सीमा से लेकर देश के उत्तरी राज्य क्वींसलैंड तक, खेतों और अनगिनत घरों को तबाह कर दिया है, जिससे फसलों और संसाधनों को लाखों डॉलर का नुकसान हुआ है।

ब्रोमैडिओलोन जहर के प्रयोग पर चिंता
चूहों से निपटने के विषय पर न्यू साउथ वेल्स राज्य के अधिकारियों ने बताया है कि उनके पास 5000 लीटर चूहों को मारने वाला सबसे खतरनाक रसायन (ब्रोमैडिओलोन) है। इसके एक डोज से ही चूहा मर जाता है, लेकिन कई लोगों ने इस रसायन के प्रति चिंता भी व्यक्त की है। कई लोगों का कहना है कि चूहों के खिलाफ ऐसे रसायन का प्रयोग करने से फसलें खराब हो सकती हैं और अन्य वन्यजीवों की मौत भी हो सकती है। चार्ल्स स्टर्ट विश्वविद्यालय के पारिस्थितिकी विद मैगी वॉटसन का कहना है कि यह जहर पर्यावरण में कहीं भी उपयोग के लिए "बहुत खतरनाक" है। वॉटसन के अनुसार, ब्रोमैडिओलोन मिट्टी में रिस सकता है और खाद्य श्रृंखला को जहरीला बना सकता है। वहीं एनएसडब्ल्यू सरकार का कहना है कि उन्हें किसानों पर पूरा भरोसा है कि वे इस रसायन का सही तरीके से इस्तेमाल करेंगे। अधिकारियों के अनुसार जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई कीटनाशक और पशु चिकित्सा औषधि प्राधिकरण हमें इस रसायन का उपयोग करने की मंजूरी देता है, हम इसे बिल्कुल मुफ्त में वितरित करना शुरू कर सकते हैं।
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कैसे पैदा हुई यह स्थिति
पिछले कई सालों की तुलना में 2020 में ऑस्ट्रेलिया में बहुत अच्छी बारिश हुई। बारिश ने चूहों के विस्तार के लिए आदर्श स्थिति पैदा की। चूहों की संख्या पर ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी (सीएसआईआरओ) के शोधकर्ता स्टीव हेनरी ने कहा कि पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में अभी चूहों की संख्या गिनने की कोशिश करना आकाश में सितारों को गिनने की कोशिश करने जैसा होगा। प्रति हेक्टेयर में 800 से 1,000 चूहों का होना "प्लेग अनुपात" माना जाता है। हालांकि, सरकार ने इस हालिया स्थिति को अस्थायी समस्या बताया है। 

चूहों के फैलने से होगा एक तिहाई आर्थिक नुकसान
उद्योग समूह एनएसडब्ल्यू फार्मर्स के अनुसार गेहूं और जौ जैसे अनाजों के साथ-साथ पशुओं के चारे का नुकसान होने से कृषि व्यवसायों पर प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव पड़ रहा है। एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इस समस्या से होने वाला लाभ एक तिहाई कम हो जाएगा। समूह ने इस विषय पर अप्रैल में चेतावनी जारी की थी। चूहों की बढ़ती संख्या को देखते हुए किसानों ने चेतावनी दी है कि उनके पास अपनी सर्दियों की फसल काटने का समय नहीं है।

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