अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम को बढ़ाने की कोशिशों में प्रगति हुई है। दोनों पक्षों ने 22 अप्रैल के बाद इसे दो हफ्ते और बढ़ाने पर सिद्धांत रूप में सहमति जताई है। मध्यस्थ देश परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध मुआवजे जैसे मुद्दों पर समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कम करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष-विराम को बढ़ाने के लिए मध्यस्थ सक्रिय हो गए हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि हालात को काबू में लाने के लिए कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक मौजूदा संघर्ष-विराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में मध्यस्थ देश इसे कम से कम दो हफ्ते और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बातचीत को और समय मिल सके। अधिकारियों ने बताया कि दोनों पक्षों ने सिद्धांत रूप में संघर्ष-विराम बढ़ाने पर सहमति जताई है और जल्द ही नई वार्ता शुरू हो सकती है।
क्या सीजफायर बढ़ाने पर बनी सहमति?
मध्यस्थों के प्रयासों से अमेरिका और ईरान ने 'इन प्रिंसिपल' सहमति दी है कि संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाया जाए। हालांकि यह अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।
क्या होंगे बातचीत के बड़े मुद्दे?
मध्यस्थ तीन प्रमुख मुद्दों पर समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई शामिल है। यही मुद्दे दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद का कारण बने हुए हैं।
क्या फिर से शुरू होगी सीधी बातचीत?
अधिकारियों के अनुसार, दोनों देश जल्द ही बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। मध्यस्थों का मानना है कि अगर इस बार बातचीत सफल रही तो लंबे समय के लिए शांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
क्या क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत हैं?
संघर्ष-विराम बढ़ने से पश्चिम एशिया में तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है। इससे वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।