ईरान के संवर्धित यूरेनियम को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच रूस ने एक बार फिर आगे बढ़कर समाधान का संकेत दिया है। मॉस्को की इस पेशकश को सिर्फ सहयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है, जो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समीकरण बदल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हलचल तेज हो गई है। रूस ने साफ किया है कि वह ईरान के संवर्धित यूरेनियम से जुड़े मुद्दे के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बीजिंग में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि मॉस्को इस संवेदनशील मामले में कई तरीकों से सहयोग कर सकता है।
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उन्होंने बताया कि रूस उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम को फ्यूल-ग्रेड यूरेनियम में बदलने की प्रक्रिया में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर यूरेनियम की एक निश्चित मात्रा को रूस में सुरक्षित रखने का विकल्प भी मौजूद है।
लावरोव ने दोहराया कि कोई भी कदम ईरान की सहमति और उसके अधिकारों का सम्मान करते हुए ही उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान को भी अन्य देशों की तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है।
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2015 का परमाणु समझौता
रूस, ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच हुआ ईरान परमाणु समझौता 2015 इस पूरे मुद्दे की अहम कड़ी है। इस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी, जिसके बदले उसे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी गई थी। इस दौरान रूस ने ईरान से बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अमेरिका के हटने से बढ़ा तनाव
हालात तब बदले जब डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने एकतरफा तरीके से इस समझौते से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद रूस लगातार ईरान के समर्थन में खड़ा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह पेशकश परमाणु विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति पर निर्भर करेगा।