विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारतीय समुदाय के लोगों के एक कार्यक्रम में कहा कि चीन के साथ 1990 के दशक से हमारा समझौता है, जिसके तहत सीमावर्ती इलाके में बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां ले जाना प्रतिबंधित है। उन्होंने इसका अनादर किया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि चीन ने सीमा समझौतों का अनादर किया है और दोनों देशों के बीच गलवां घाटी में हुए संघर्ष की छाया आपसी रिश्तों पर पड़ी है। इसके कारण द्विपक्षीय संबंध बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। विदेश मंत्री तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में ब्राजील के साओ पाउलो पहुंचे हैं। जयशंकर पराग्वे और अर्जेंटीना भी जाएंगे।
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जयशंकर ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों के एक कार्यक्रम में कहा कि चीन के साथ 1990 के दशक से हमारा समझौता है, जिसके तहत सीमावर्ती इलाके में बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां ले जाना प्रतिबंधित है। उन्होंने इसका अनादर किया। आपको पता ही है गलवां घाटी में क्या हुआ। वह समस्या अब तक नहीं सुलझी है और उसने निश्चित रूप से एक छाया डाल दी है। चीन के साथ सीमा पर वर्तमान हालत के बारे में उन्होंने कहा, रिश्ता एकतरफा नहीं हो सकता और इसे बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान जरूरी है। वे हमारे पड़ोसी हैं।
हर कोई अपने पड़ोसी से अच्छे संबंध चाहता है। यह निजी जीवन और देश के स्तर दोनों जगह लागू होता है। लेकिन हर कोई सम्मानजनक शर्त पर ऐसे संबंध चाहता है। मुझे आपका आदर करना चाहिए और आपको मेरा। इसलिए हमारे विचार से हम इसे लेकर स्पष्ट हैं कि हमें आपसी सम्मान पर आधारित संबंध बनाना चाहिए। हर किसी का अपना हित होता है और हमें इस बात को लेकर संवेदनशील होना चाहिए कि किसी रिश्ते में दूसरे पक्ष की चिंताएं क्या हैं।
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भारतीय समुदाय को धन्यवाद दिया
इस मौके पर विदेश मंत्री ने भारत और ब्राजील के लिए प्रभावी संपर्क के लिए भारतीय समुदाय को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, भारत-ब्राजील के रिश्ते अच्छी भावना, बेहतर सद्भाव और बढ़ते सहयोग के आधार पर परिभाषित होते हैं। इससे बाद जयशंकर ने ट्वीट किया, भारतीय समुदाय संग साओ पाउलो में भेंट के साथ लैटिन अमेरिका का दौरा आरंभ हुआ। भारतीय आजादी के 75 साल पूरे होने पर उनके साथ प्रगति और उम्मीदों को साझा किया।
2020 से शुरू हुआ तनाव
भारत-चीन के बीच अप्रैल-मई 2020 में लद्दाख के फिंगर एरिया, गलवां घाटी, हॉट स्पिंग्र और कोगरंग नाला क्षेत्रों में तनाव आरंभ हुआ था। इसकी परिणति जून में गलवां घाटी में खूनी संघर्ष के रूप में हुई थी।