10 साल की कोशिश के बाद सफलता
मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के लिए भारत पिछले 10 साल से कोशिश कर रहा था। उसने सबसे पहले 2009 में प्रस्ताव रखा था। इसके बाद 2016 में भारत ने अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध परिषद के समक्ष प्रस्ताव रखा। इन्हीं देशों की मदद से भारत ने 2017 में तीसरी बार यह प्रस्ताव रखा लेकिन सफलता नहीं मिली। फरवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने प्रस्ताव पेश किया था।
क्या है 1267 प्रतिबंध समिति
1267 प्रतिबंध समिति के तहत संयुक्त राष्ट्र का कोई भी देश किसी आंतकवादी को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए निवेदन कर सकता है। इस पर सुरक्षा परिषद की स्थाई समिति का अनुमोदन करना जरूरी है। अगर सुरक्षा परिषद का कोई भी एक स्थाई सदस्य देश इस प्रस्ताव का वीटो करता है तो वह निवेदन पारित नहीं होगा। इससे पहले चीन भारत के इस प्रस्ताव को चार बार वीटो कर चुका है।
प्रतिबंध लगाने के बाद ये कार्रवाई की जा सकेगी
वैश्विक आतंकी करार दिए जाने के बाद मसूद की दुनियाभर में मौजूद संपत्ति और बैंक खातों को फ्रीज किया जा सकेगा। साथ ही उसके कहीं आने जाने पर रोक लग सकेगी। साथ ही उसके हथियारों पर प्रतिबंध रहेगा और इन्हें जब्त कर लिया जाएगा।
विदेश सचिव विजय गोखले ने चीन में उठाया था मुद्दा
बता दें कि भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने बीती 23 अप्रैल को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के समक्ष अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का मुद्दा उठाया था। पाकिस्तानी आतंकी अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत के प्रयासों पर अड़ंगा लगाने को लेकर गोखले ने चीन की नीतियों की निंदा भी की थी। उन्होंने जोर देकर कहा था कि दोनों देशों को एक दूसरे के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। इस दौरान भारतीय पक्ष ने चीन को मसूद अजहर की आतंकी गतिविधियों के सभी सबूत भी सौंपे थे।