पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' शुरू करने की घोषणा की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य फारस की खाड़ी में फंसे 87 देशों के लगभग 23,000 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। रूबियो ने कहा कि ईरानी शासन ने इन निर्दोष लोगों को वहां बंधक जैसी स्थिति में रखा है।
क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?
पिछले दो महीनों से निर्दोष नाविक और व्यापारिक जहाजों के कर्मचारी समुद्र में फंसे हुए हैं। रूबियो ने आरोप लगाया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की आपराधिक और विनाशकारी घेराबंदी कर रहा है। उन्होंने ईरान की इस हरकत को समुद्री डकैती करार दिया। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर बिना किसी वजह के हमले किए गए और गोलियां चलाई गईं। इन जहाजों और देशों का इस पूरे विवाद से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
कई देशों ने मांगी मदद
कई देशों ने सार्वजनिक और निजी तौर पर अमेरिका से मदद मांगी थी। वे चाहते थे कि उनके जहाजों को आजाद कराया जाए और समुद्री रास्ते पर आवाजाही फिर से शुरू हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन अपीलों को स्वीकार किया है। उन्होंने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि वे फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाएं और उन्हें बाहर निकालें। रूबियो ने इसे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में पहला कदम बताया। उन्होंने कहा कि ईरान की आर्थिक आगजनी को अब खत्म किया जाएगा।
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विदेश मंत्री ने साफ किया कि अमेरिका अपने दोस्तों की मदद करेगा और तेहरान जैसे शासन के खिलाफ मजबूती से खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों के लिए सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक रक्षात्मक अभियान है। अमेरिकी सेना तब तक गोली नहीं चलाएगी जब तक उन पर पहले हमला नहीं होता। अगर ईरान की तेज नावें, ड्रोन या मिसाइलें अमेरिकी सेना के लिए खतरा बनती हैं, तो उन्हें तुरंत मार गिराया जाएगा।
होर्मुज नहीं चलेगी ईरान की मर्जी
उन्होंने आगे कहा, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपनी मर्जी चलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने ईरान की कार्रवाई को आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को नियंत्रित नहीं कर सकता। 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के शुरुआती चरणों में अमेरिकी झंडे वाले व्यापारिक जहाज सफलतापूर्वक इस रास्ते से गुजर चुके हैं। अब अमेरिकी सेना इस सुरक्षा घेरे को और बढ़ा रही है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनने से बचाया जा सके।
रूबियो ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' का जिक्र करते हुए बताया कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ाया जाएगा। अमेरिकी प्रतिबंधों को अब और भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इरादों को परखने की गलती न करे। रूबियो के अनुसार, ट्रंप जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं और अगर ईरान ने उन्हें चुनौती दी, तो अंत में हार ईरान की ही होगी।
इस्राइल और लेबनान पर कही ये बात
क्षेत्रीय तनाव पर बात करते हुए रूबियो ने कहा कि इस्राइल और लेबनान के बीच असली समस्या हिजबुल्लाह है। हिजबुल्लाह लेबनान की धरती का इस्तेमाल इस्राइल पर हमले के लिए करता है, जिससे लेबनान के लोगों को भी भारी नुकसान होता है। उन्होंने साफ कहा कि हिजबुल्लाह, हमास और हूतियों जैसे समूहों के पीछे ईरान का हाथ है। ईरान इन गुटों के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है। अमेरिका चाहता है कि लेबनान की सरकार और सेना इतनी सक्षम बने कि वे हिजबुल्लाह को चुनौती दे सकें और उन्हें निहत्था कर सकें।
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