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अफगानिस्तान: तालिबान की जीत का परिणाम, बंद हुए कई विदेशी वाणिज्यिक दूतावास

Tue, 06 Jul 2021 08:39 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

  • उत्तरी अफगानिस्तान में रूस-तुर्की दूतावास बंद, ईरान ने सीमित कीं गतिविधियां
  • ताजिकिस्तान सीमा पर आरक्षित तजाकी सैनिकों को सुरक्षा के लिए बुलाया गया
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तालिबानी आतंकी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अफगानिस्तान में नाटो और अमेरिकी सेनाओं की वापसी के साथ लगातार तालिबान की बढ़ती जीत को देखते हुए उत्तरी अफगानिस्तान स्थित विदेशी वाणिज्यिक दूतावासों पर ताले लटकने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को अधिकारियों और कुछ रिपोर्टों में इस बात की जानकारी दी गई है। जबकि उत्तर अफगानिस्तान से लगी ताजिकिस्तान सीमा पर आरक्षित तजाकी सैनिकों को चाक-चौबंद सुरक्षा के लिए बुलाया जा रहा है। 

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बताया गया है कि उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान जिस गति से उत्तरी अफगानिस्तान में आगे बढ़ रहा है उससे कुछ देशों को अपने वाणिज्यिक दूतावास बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एक दिन पहले ही दोहा से तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने विदेशियों को देश छोड़कर चले जाने की धमकी दी थी। उत्तरी बल्ख प्रांत की राजधानी और अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ में तुर्की और रूस के वाणिज्य दूतावासों के बंद होने की खबर है। 

जानकारी के अनुसार ईरान ने भी यहां अपने वाणिज्य दूतावास में गतिविधियां सीमित कर दी हैं। इसके साथ ही बल्ख प्रांत की प्रांतीय राजधानी अपेक्षाकृत शांत है। जबकि ताजिकिस्तान ने उसके देश में 1000 से ज्यादा अफगान सैनिकों के तालिबान से भागकर आने की पुष्टि की है। इसे देखते हुए ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रखमोन ने सीमा को मजबूत करने के लिए 20 हजार सैनिकों को भेजने का आदेश दिया है।

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तुर्की-रूस के कूटनीतिकों ने छोड़ा मजार-ए-शरीफ

बल्ख प्रांत में प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुनीर फरहाद ने मंगलवार को बताया कि भारत समेत उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के वाणिज्य दूतावासों ने राज्य में अपनी सेवाएं कम कर दी हैं। उन्होंने कहा कि तुर्की और रूस ने अपने वाणिज्य दूतावास बंद कर दिए हैं और उनके कूटनीतिक शहर छोड़कर चले गए हैं। रूस में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यहां के घटनाक्रम पर चिंता जताई है। हालांकि उनकी योजना अपने पूर्व गणराज्य की मदद के लिए सेना भेजने की नहीं है।

ताजिकिस्तानी पक्ष की तालिबान के साथ झड़प नहीं

ताजिकिस्तान की सरकार ने कहा है कि अफगान सैनिकों को मानवीय आधार पर सीमा पार करने की इजाजत दी गई है लेकिन ताजिक पक्ष की सीमा चौकियों पर देश के बलों का नियंत्रण है। ताजिक पक्ष की तरफ से तालिबान से कोई झड़प नहीं हो रही है। लेकिन देश की सीमाओं पर कोई खतरा नहीं रहे इस कारण ताजिक सरकार ने अपने दक्षिणी इलाके में सेना तैनाती बढ़ाने के आदेश दिए हैं।
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तालिबान के चलते छोटे अफगानी व्यवसायी चिंता में

उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान की लगातार होती जीत से यहां के लोगों में दहशत स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। पिछली बार तालिबानी शासन (1996 से 2001) में कई व्यवसायों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इनमें ब्लूटी पार्लर, पतंगों की दुकान, फैंसी हेयर सैलून और कबूतर रेसिंग शामिल थे। 

अब इन व्यवसायों से जुड़े छुटपुट व्यवसायी फिलहाल तालिबान की बढ़त से काफी चिंता में दिखाई दे रहे हैं। बता दें कि उत्तरी अफगानिस्तान में अफगानिस्तानी सैनिकों के मोर्चा छोड़कर भागने के बाद वहां तालिबान की गतिविधियां तेज हो गई हैं और रातों-रात उसने कई जिलों पर कब्जा कर लिया है।
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