बल्ख प्रांत में प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुनीर फरहाद ने मंगलवार को बताया कि भारत समेत उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के वाणिज्य दूतावासों ने राज्य में अपनी सेवाएं कम कर दी हैं। उन्होंने कहा कि तुर्की और रूस ने अपने वाणिज्य दूतावास बंद कर दिए हैं और उनके कूटनीतिक शहर छोड़कर चले गए हैं। रूस में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यहां के घटनाक्रम पर चिंता जताई है। हालांकि उनकी योजना अपने पूर्व गणराज्य की मदद के लिए सेना भेजने की नहीं है।
ताजिकिस्तान की सरकार ने कहा है कि अफगान सैनिकों को मानवीय आधार पर सीमा पार करने की इजाजत दी गई है लेकिन ताजिक पक्ष की सीमा चौकियों पर देश के बलों का नियंत्रण है। ताजिक पक्ष की तरफ से तालिबान से कोई झड़प नहीं हो रही है। लेकिन देश की सीमाओं पर कोई खतरा नहीं रहे इस कारण ताजिक सरकार ने अपने दक्षिणी इलाके में सेना तैनाती बढ़ाने के आदेश दिए हैं।
उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान की लगातार होती जीत से यहां के लोगों में दहशत स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। पिछली बार तालिबानी शासन (1996 से 2001) में कई व्यवसायों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इनमें ब्लूटी पार्लर, पतंगों की दुकान, फैंसी हेयर सैलून और कबूतर रेसिंग शामिल थे।
अब इन व्यवसायों से जुड़े छुटपुट व्यवसायी फिलहाल तालिबान की बढ़त से काफी चिंता में दिखाई दे रहे हैं। बता दें कि उत्तरी अफगानिस्तान में अफगानिस्तानी सैनिकों के मोर्चा छोड़कर भागने के बाद वहां तालिबान की गतिविधियां तेज हो गई हैं और रातों-रात उसने कई जिलों पर कब्जा कर लिया है।