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Pakistan: विवादास्पद मौलवी की तारीफ करने से किया इनकार, अहमदी समुदाय के शख्स की हत्या

Fri, 12 Aug 2022 06:50 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के संस्थापक खादिम हुसैन रिजवी की तारीफ में नारे नहीं लगाने पर एक धार्मिक कट्टरपंथी ने रबवाह के मुख्य बस स्टॉप पर नसीर अहमद की चाकू मारकर हत्या कर दी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुक्रवार को एक विवादास्पद मौलवी की तारीफ करने से इनकार करने पर अहमदी समुदाय के 62 वर्षीय व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। 1974 में पाकिस्तान की संसद ने अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक बाद उन्हें खुद को मुस्लिम कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उन्हें उपदेश देने और तीर्थयात्रा के लिए सऊदी अरब की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। ताजा घटना लाहौर से करीब 170 किलोमीटर दूर रबवाह (चिनाब नगर) में हुई। रबवाह अहमदी समुदाय का मुख्यालय है। 

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तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के संस्थापक खादिम हुसैन रिजवी की तारीफ में नारे नहीं लगाने पर एक धार्मिक कट्टरपंथी ने रबवाह के मुख्य बस स्टॉप पर नसीर अहमद की चाकू मारकर हत्या कर दी। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने कहा कि उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि संदिग्ध ने अहमद को रोका और उससे रिजवी के पक्ष में नारे लगाने को कहा। मना करने पर आरोपी ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। स्थानीय लोगों ने टीएलपी सदस्य को दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में हत्यारे ने टीएलपी के नारे लगाए और अहमद की हत्या पर कोई पछतावा नहीं जताया। फायरब्रांड पाकिस्तानी मौलवी रिजवी की 2020 में मौत हो गई थी। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) प्रमुख को सेना प्रमुख के खिलाफ विद्रोह करने के लिए सेना के सैनिकों भड़काने पर गिरफ्तार किया गया था और मई 2019 में रिहा होने से पहले उसने कई महीने जेल में बिताए थे। सैकड़ों टीएलपी कार्यकर्ताओं 2020 में एक फ्रांसीसी पत्रिका में ईशनिंदा वाले कार्टूनों के प्रकाशन की निंदा करने और सरकार को फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने की मांग को लेकर राजधानी की घेराबंदी की थी।
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सलीमुद्दीन ने कहा कि अहमद समुदाय का एक सक्रिय सदस्य था और कई अन्य अहमदियों की तरह शुक्रवार को कब्रिस्तान जाकर अपने प्रियजनों के लिए प्रार्थना करता था। पुलिस के अनुसार, संदिग्ध की पहचान हाफिज शहजाद हसन सियालवी के रूप में हुई है, जो अपने गृहनगर सरगोधा शहर में एक टीएलपी मदरसा का पूर्व छात्र है।

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