रही बात इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रॉकेटों से हमले की, तो अमेरिका ने ईरान समर्थक सैन्य गुटों को इन हमलों का मास्टरमाइंड मानते हुए, उनके ख़िलाफ कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई ने बग़दाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर में संभावित हमले को प्रेरित किया था।
सुलेमानी को मारने का फैसला क्यों किया गया, यह समझाते हुए अमेरिका ने ना सिर्फ उनके पिछले कारनामों पर जोर दिया, बल्कि जोर देकर यह भी कहा कि उनकी हत्या एक निवारक के तौर पर की गई है। अमेरिका ने अपने आधिकारिक बयान में लिखा भी है कि कमांडर सुलेमानी सक्रिय रूप से इराक और उससे लगे क्षेत्र में अमेरिकी राजनयिकों और सेवा सदस्यों पर हमला करने की योजनाएं विकसित कर रहे थे।
अब बड़ा सवाल ये है कि आगे क्या होता है। राष्ट्रपति ट्रंप जरूर यह सोच रहे होंगे कि उन्होंने इस नाटकीय कार्रवाई के जरिए एक साथ दो निशाने लगा लिए हैं। पहला तो ये कि इस हमले के जरिए अमेरिका ने ईरान को धमकाया है। और दूसरा ये कि मध्य-पूर्व में अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब और इसराइल, जिनकी बेचैनी पिछले कुछ वक्त से लगातार बढ़ रही थी, उन्हें अमेरिका ने यह जता दिया है कि अमेरिका के तेवर अभी भी कायम हैं, वो उनके साथ है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।
ईरान अब क्या कर सकता है?
हालांकि, यह लगभग अकल्पनीय है कि ईरान इसके जवाब में कोई आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं देगा। इराक में तैनात पांच हजार अमेरिकी सैनिक संभवत: ईरान के लक्ष्य पर होंगे। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि अतीत में ईरान और उसके समर्थकों ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर ऐसा किया है।
खाड़ी में अब तनाव बढ़ेगा ऐसा लगता है और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि इसका प्रारंभिक प्रभाव तेल की कीमतों में वृद्धि के तौर पर दिखाई देगा। अमेरिका और उसके सहयोगी अब अपने बचाव पर ध्यान दे रहे हैं। अमेरिका ने पहले ही बग़दाद स्थित अपने दूतावास को छोटी मात्रा में सहायता भेज दी है। साथ ही जरूरत पड़ने पर वो इस क्षेत्र में अपने सैन्य बेड़ों की संख्या को भी बढ़ा सकता है।
लेकिन यह इतना सीधा-सपाट नहीं होगा कि ईरान एक हमले का जवाब दूसरे हमले से ही दे। माना जा रहा है कि इस बार ईरान की प्रतिक्रिया असंयमित होगी। दूसरे शब्दों में कहें तो संभावना ये भी है कि ईरान सुलेमानी के बनाए गए और फंड किए गए गुटों से व्यापक समर्थन हासिल करने का प्रयास करे।
उदाहरण के लिए ईरान बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर घेराबंदी को नया रूप दे सकता है। वो इराकी सरकार को और भी मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। साथ ही इराक में अन्य जगहों पर प्रदर्शनों को भड़का सकता है ताकि वो इनके पीछे अन्य हमले कर सके।
सुलेमानी को मारने का अमेरिकी फैसला कितना सही?
ईरान की बहुचर्चित कुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या स्पष्ट तौर पर अमेरिकी फौज की इंटेलिजेंस और उनकी सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन है।
- पर क्या राष्ट्रपति ट्रंप का इस कार्रवाई को अनुमति देना, सबसे बुद्धिमानी का फैसला कहा जा सकता है?
- क्या अमेरिका इस घटना के बाद के परिणामों को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है?
- और क्या इससे मध्य-पूर्व को लेकर डोनल्ड ट्रंप की समग्र रणनीति के बारे में पता चलता है? क्या इसमें किसी तरह का बदलाव हो गया है? क्या ईरानी अभियानों के प्रति यह एक नए स्तर की असहिष्णुता है?
या सिर्फ ये एक राष्ट्रपति द्वारा एक ईरानी कमांडर को सजा देने तक सीमित है जिसे वो एक 'बहुत बुरा आदमी' कहते आए हैं।