फीनिक्स सेटलमेंट ट्रस्ट ने फीनिक्स सेटलमेंट में आयोजित एक अंतरधार्मिक बैठक में जानबूझकर हिंदू प्रार्थनाओं को छोड़ दिए जाने के आरोप के बाद महात्मा गांधी की पोती इला गांधी ने कहा कि नफरत, दुश्मनी और हिंसा किसी भी धार्मिक शिक्षा का हिस्सा नहीं है। जो लोग धर्म के नाम पर इन्हें बढ़ावा देते है, वे खुरापाती दिमान के चलते गलत व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आइए विभाजन और नफरत की ताकतों का विरोध करें।
सभी धर्मग्रंथ दयालु इंसान बनाना सिखाती है- इला गांधी
सोशल मीडिया पोस्ट्स के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे सभी विश्वास और हमारे धर्मग्रंथ हमें अच्छे, दयालु और प्रेमपूर्ण इंसान बनने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। घृणा, शत्रुता और हिंसा हमारी आवश्यक धार्मिक शिक्षाओं का हिस्सा नहीं हैं। इस तरह के कदम हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने और गांधीजी और मुझे हिंदू समुदाय से अलग करने का एक प्रयास थे।
हमें इन शरारतों को रोकना होगा- इला गांधी
इला ने साप्ताहिक पोस्ट में एक खुले पत्र के जरिए कहा कि तथ्यों को सार्वजनिक रूप से बताना जरूरी है ताकि जिस शरारत की कोशिश की जा रही, उसे अभी रोका जा सके। इला ने चार हिंदू संगठनों को निमंत्रण का हवाला देते हुए कहा, स्पष्ट करने के लिए, मैंने कई हिंदुओं को व्यक्तिगत रूप से और कई हिंदू आस्था नेताओं को सामूहिक रूप से इस समारोह में हिंदू प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया था।
120 वर्षों में किसी ने नहीं उठाए थे ऐसे सवाल- इला गांधी
उन्होंने कहा कि खास बात यह है कि आज तक फीनिक्स सेटलमेंट के अस्तित्व के 120 वर्षों में किसी ने भी हम पर जानबूझकर एक संप्रदाय को छोड़ने का आरोप नहीं लगाया है, जैसा कि वर्तमान समय में लाया जा रहा है। गौरतलब है कि इला गांधी दक्षिण अफ्रीकी में शांति कार्यकर्ता और अध्यक्ष है। डरबन में फीनिक्स सेटलमेंट ट्रस्ट अपने दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने शुरू किया था।