मधेशी नेता राजेन्द्र महतो ने नेपाल के संविधान के नस्लीय राष्ट्रवाद के आधार पर बनाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसी कारण देश के सभी लोगों ने अभी तक इसे आत्मसात नही किया है। अमर उजाला से बात करते हुए पूर्व राष्ट्रीय जनता पार्टी अध्यक्ष मंडल के सदस्य महतो ने कहा कि संविधान संशोधन एक राष्ट्रीय सवाल है, अत: इसके संशोधन में जनता की सहमति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उन्होने कहा कि नक्शा छापना ही केवल राष्ट्रीय सवाल नहीं है, बल्कि जनता को उनके अधिकार की जानकारी होना भी राष्ट्रीय सवाल है।
नस्लीय राष्ट्रवाद के आधार पर बना नया संविधान देश के सभी व्यक्तियों द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होने आगे कहा कि इस समय संविधान संशोधन का सवाल उठा है। जिस संविधान में सभी लोगों, वर्ग, जाति, समुदाय क्षेत्र की भावनाओं को ही शामिल न किया गया हो, ऐसे संविधान संशोधन का सवाल ही नहीं उठता है।
महतो ने कहा कि सिर्फ कागज पर नक्शा छापने से ही राष्ट्रीयता नहीं होती है। आखिर सवाल यह है कि 50-60 वर्ष पहले नेपाल के नक्शे में शामिल रहे कालापानी, लिपुलेक आदि को नेपाल के नक्शे में से किसने हटाया, ऐसा राष्ट्रघाती काम किसने किया? जनता के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है।
महतो ने अन्य राष्ट्रीय दलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मधेशवादी पार्टी, नेता के ऊपर प्रश्न उठाने से पहले खुद पर प्रश्न उठाना सीखो। यदि संविधान संशोधन किया जाता है, तो मधेशी आदिवासी जनजाति दलित सभी की भावनाओं को समेटते हुए संविधान संशोधन किया जाना चाहिए। महतो ने आगे कहा कि संविधान संशोधन से सीमा संबंधी समस्या का समाधान नहीं मिलेगा, सरकार को ही कोई कूटनीतिक पहल करनी होगी। इसके लिए वार्ता के माध्यम से विचार-विमर्श करने के लिए दोनों देशों को अपने-अपने प्रमाण को सामने रखकर समस्या का समाधान करना चाहिए।
इसके लिए सबसे पहले दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए सहज वातावरण बनाया जाना आवश्यक है। महतो ने कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को संसद में ‘भारत का कोरोना’ और ‘सिंह मेव जयते’ जैसे प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत जैसा संबंध विश्व के किसी भी राष्ट्र के बीच नहीं है। यह संबंध राजनीतिक नहीं है, यह जनस्तर का संबंध है।
यह सांस्कृतिक संबंध है। यह पूर्व काल से चला आ रहा संबंध है। महतो ने कहा कि हम लोग (मधेशी दल और नेता) संविधान संशोधन की प्रस्ताव पैकेज में लाने के लिए सरकार से आग्रह कर रहे हैं।