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Hajj Yatra: 30 साल में सबसे कम लोग हज करने सऊदी पहुंचे, कोविड-19 की अवधि छोड़ मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े

Fri, 06 Jun 2025 08:00 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

सऊदी अरब में इस साल हज यात्रा के लिए 16 लाख से ज्यादा ही मुस्लिम पहुंचे। 30 सालों में ऐसा पहली बार है, जब इतनी कम संख्या में लोग हज यात्रा करने पहुंचे हैं। हज मंत्रालय ने आंकड़े जारी कर इसकी जानकारी दी है। हालांकि, मंत्रालय ने इस अवधि के दौरान कोरोना महामारी के समय को शामिल नहीं किया है। 
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हज यात्रा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सऊदी अरब में 30 सालों में इस साल सबसे कम लोग हज करने के लिए पहुंचे हैं। सऊदी अरब के हज मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। मंत्रालय ने इस अवधि में कोविड-19 महामारी के समय को शामिल नहीं किया है। हालांकि, मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि जायरीनों की कम संख्या के पीछे क्या कारण रहा है। 

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हज मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इस साल हज यात्रा में केवल 1,673,230 मुस्लिम ही आए। हज मंत्रालय ने बताया कि इन जायरीनों में से अधिकांश सऊदी अरब के बाहर से थे, यानी विदेशी थे।

2012 में हज करने सबसे ज्यादा मुसलमान पहुंचे
हज मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस साल लगभग 160,000 हाजियों की संख्या कम है। हज मंत्रालय का कहना है कि यह संख्या कोविड-19 महामारी की तुलना में बहुत कम है। महामारी से पहले हर साल 2 मिलियन (20 लाख) से ज्यादा लोग हज करने के लिए आते थे। 2012 में हज यात्रा के लिए पहुंचे लोगों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस साल 3.16 मिलियन से ज्यादा मुसलमान हज करने के लिए पहुंचे थे। 
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कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने लगाए थे प्रतिबंध
सऊदी अरब सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान हज करने वालों की संख्या को बहुत सीमित कर दिया था। 2020 से 2022 तक बहुत कम लोगों को ही हज करने की अनुमति दी गई थी। महामारी के बाद, 2023 में पहली बार बिना किसी पाबंदी के हज हुआ था।

इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है हज
हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। यह मुसलमानों का एक धार्मिक दायित्व है, जिसमें अनुष्ठान और पूजा-पाठ शामिल है। यह मुसलमानों के लिए जीवन भर का आध्यात्मिक अनुभव होता है, जिसमें वह अल्लाह से अपने गुनाहों की क्षमा मांगते हैं। हालांकि, इस साल महंगाई, आर्थिक संकट, बहुत ज्यादा गर्मी और कड़े नियमों के कारण बहुत लोग हज नहीं कर पाए हैं। 

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पैगंबर ने माउंट अराफात में दिया था आखिरी उपदेश
इससे पहले, बृहस्पतिवार को जायरीन अराफात में इबादत और चिंतन करने के लिए इकट्ठा हुए। इस्लाम में अराफात का बहुत महत्व है। माउंट अराफात मक्का के दक्षिण-पूर्व में एक पहाड़ी है, जो इस्लाम में बहुत पवित्र मानी जाती है। अराफात का उल्लेख कुरान में किया गया है। माना जाता है कि यहीं पर पैगंबर मुहम्मद ने अपने अंतिम हज के दौरान आखिरी उपदेश दिया था। 

मीना में शैतान को पत्थर मारेंगे जायरीन
शुक्रवार को जायरीन मीना के एक विशाल तंबू शहर में जाएंगे। जहां वह शैतान को पत्थर मारने की रस्म निभाएंगे। यह रस्म खंभों पर कंकड़ फेंककर पूरी की जाती है। 

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