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चीन: माओ की तरह शी बन जाएंगे सर्वोच्च नेता, कम्युनिस्ट पार्टी की अहम बैठक शुरू

Mon, 08 Nov 2021 05:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकें गोपनीय रहती हैं। उनके बारे में उतनी ही जानकारी दुनिया को मिलती है, जितनी पार्टी मीडिया ब्रीफिंग में बताती है। सोमवार को शुरू हुई बैठक में पार्टी के सेंट्रल कमेटी के 370 से भी ज्यादा पूर्ण और वैकल्पिक सदस्य भाग ले रहे हैं...
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सीपीसी बैठक - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी का वह बहु-प्रतीक्षित पूर्ण अधिवेशन शुरू हो गया है, जिस पर सारी दुनिया की निगाहें हैं। माना जा रहा है कि चार दिन तक चलने वाले इस अधिवेशन से चीन की आगे की दिशा तय होगी। समझा जा रहा है कि इस अधिवेशन के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी में वही हैसियत बन जाएगी, जो कभी माओ जे दुंग और देंग श्याओ पिंग की रही थी।

अगले पार्टी महाधिवेशन में नए नेतृत्व का चुनाव

इस पूर्ण अधिवेशन के दौरान सेंट्रल कमेटी एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने वाली है। इसे पार्टी की ‘महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों और अनुभव पर संकल्प-पत्र’ का नाम दिया गया है। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक खबर में बताया गया है कि इस सम्मेलन के बाद पार्टी नीति संबंधी कुछ महत्त्वपूर्ण घोषणाएं करेगी। इसके साथ ही इस अधिवेशन में अगले साल होने वाली पार्टी कांग्रेस (महाधिवेशन) की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अगले पार्टी महाधिवेशन में नए नेतृत्व का चुनाव होगा। उस बारे में भी कुछ झलक इस पूर्ण अधिवेशन (प्लेनम) से मिलने की संभावना है।

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चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकें गोपनीय रहती हैं। उनके बारे में उतनी ही जानकारी दुनिया को मिलती है, जितनी पार्टी मीडिया ब्रीफिंग में बताती है। सोमवार को शुरू हुई बैठक में पार्टी के सेंट्रल कमेटी के 370 से भी ज्यादा पूर्ण और वैकल्पिक सदस्य भाग ले रहे हैं। यह सेंट्रल कमेटी सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की सर्वोच्च संस्था है। इसके पूर्ण अधिवेशन को चीन की राजनीति की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना समझा जाता है।

विश्लेषकों ने बताया है कि इस पूर्ण अधिवेशन में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास में शी जिनपिंग तीसरे ऐसे नेता बनेंगे, जो एतिहासिक प्रस्ताव पेश करेंगे। पार्टी के 100 साल पूरे इतिहास को लेकर आज के नेतृत्व की क्या समझ है, ये बात इस प्रस्ताव से सामने आएगी। जानकारों का कहना है कि इस पूर्ण अधिवेशन में ऐसी कई नई नीतियों को मंजूरी मिलना तय है, जिनका दूरगामी असर होगा।

अधिवेशन में तय होती हैं नीतियां

चीन में यह इतिहास रहा है कि सेंट्रल कमेटी के पूर्ण अधिवेशन में मंजूर की गई नीतियों को आधार बना कर सरकार कानून बनाती है। मसलन, 2019 में हुए पूर्ण अधिवेशन में पारित नीति के आधार पर हांगकांग के सुरक्षा कानून को बनाया गया। उससे हांगकांग की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का स्वरूप बुनियादी रूप से बदल गया है।

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने 1945 में अपना पहला एतिहासिक प्रस्ताव पास किया था। उसके साथ माओ जे दुंग की हैसियत सर्वोच्च की बन गई थी। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद 1976 में पार्टी ने नई दिशा अपनाई। उसके दो साल बाद सेंट्रल कमेटी ने 30 हजार शब्दों के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसमें माओ की कई नीतियों की सार्वजनिक आलोचना की गई। समझा जाता है कि वहां से चीन में देग श्याओ पिंग सर्वोच्च नेता बन गए। अनुमान लगाया गया है कि अब वही हैसियत शी को मिल जाएगी।

खबरों के मुताबिक पूर्ण अधिवेशन के दौरान पार्टी की कई कमेटियों को शी संबोधित करेंगे। लेकिन आमतौर पर ऐसे भाषणों का वही हिस्सा सामने आता है, जिन्हें पार्टी जारी करती है। इसलिए पर्यवेक्षकों का कहना है कि पूर्ण अधिवेशन में असल में क्या फैसले होते हैं और पार्टी क्या दिशा तय करती है, इससे जानने के लिए दुनिया को कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।

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