लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने शनिवार को सीरियाई नेता अहमद अल-शरा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने सीरिया में मौजूद शरणार्थियों की बड़ी संख्या को उनके घर वापस भेजने के तरीकों पर चर्चा की। लेबनान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दोनों नेताओं की दमिश्क में मुलाकात के बारे में जानकारी दी।
बैठक के बाद, मिकाती ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि लेबनान और सीरिया के बीच ऐतिहासिक संबंध और निकटता सभी स्तरों पर सहयोग का आधार हैं।
अल-शरा ने बशर अल-असद शासन के खिलाफ हमलों का किया था नेतृत्व
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अल-शरा, जो हयात तहरीर अल-शाम नामक इस्लामी समूह का नेता है, ने पिछले महीने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के खिलाफ हमलों का नेतृत्व किया था।
मिकाती ने सीरियाई शरणार्थी संकट के समाधान पर दिया जोर
बैठक के दौरान मिकाती ने सीरियाई शरणार्थी संकट के समाधान की जरूरत पर जोर दिया, विशेषकर उन दस लाख शरणार्थियों के लिए जो 2011 से चल रहे गृहयुद्ध के कारण लेबनान में आए हैं। उन्होंने कहा कि कई शरणार्थी वापस लौट चुके हैं, लेकिन कई अब भी लेबनान में हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करना जरूरी है, ताकि विस्थापित लोग सीरिया लौट सकें। मिकाती ने कहा कि मेरा मानना है कि अल-शरा ने इस प्रयास का समर्थन किया है।
अल-शरा ने शरणार्थियों की वापसी पर नहीं की टिप्पणी
हालांकि, अल-शरा ने शरणार्थियों की वापसी पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने सीमा सुरक्षा समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की। अल-शरा ने कहा कि विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए समितियां गठित की जाएंगी। इस दौरान उन्होंने सीरिया लोगों से अपील की कि वे इस गरीब देश के त्वरित सुधार के लिए अपनी उम्मीदों को कम करें।
सीरिया में हमारी बहुत सारी समस्याएं: अल-शरा
अल-शरा ने कहा, 'सीरिया में हमारी बहुत सारी समस्याएं हैं। हम उन सभी को एक साथ हल नहीं कर पाएंगे। हमें उन्हें विभाजित करना होगा और प्रत्येक के लिए समाधान खोजना होगा।'
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने सीरिया के साथ संबंधों को बहाल करने की जताई इच्छा
मिकाती की दमिश्क यात्रा लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के चुनाव के बाद हुई है। इस बीच, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी दमिश्क में अल-शरा, उनके समकक्ष असद हसन अल-शायबानी और अन्य अधिकारियों से बातचीत की और सीरिया के साथ संबंधों को बहाल करने की इच्छा जताई।
यह बैठक पिछले साल 8 दिसंबर को बशर अल-असद के पतन के बाद से सबसे महत्वपूर्ण यात्राओं में से एक मानी जा रही है।