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अमेरिका: गर्भपात के अधिकार पर फिर छिड़ी जंग, शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन

Wed, 04 May 2022 05:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गर्भपात के अधिकार के खिलाफ लगातार मुहिम चलाते रहे हैं। राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कई जज नियुक्त किए। तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में ऐसे जज चाहते हैं, जो गर्भपात को संवैधानिक अधिकार घोषित करने के 1973 के निर्णय को पलट दें...
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गर्भपात कानून - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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गर्भपात के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए फैसले से अमेरिका में सामाजिक ध्रुवीकरण और गहराने का अंदेशा पैदा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार रात यह पुष्टि कर दी कि न्यूज वेबसाइट पोलिटिको.कॉम में छपा दस्तावेज प्रामाणिक है। लेकिन कोर्ट ने इस बात की जांच कराने का फैसला किया है कि यह अति गोपनीय दस्तावेज कैसे लीक हो गया। अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला सुनाए जाने के पहले ही मीडिया के हाथ लग गया हो।

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गर्भपात अमेरिका में हमेशा ही सामाजिक तनाव का मुद्दा रहा है। रिपब्लिकन पार्टी का एक बड़ा धड़ा, दूसरे कंजरवेटिव समूह और ईसाई चर्च महिलाओं को गर्भपात का अधिकार देने के खिलाफ मुहिम चलाते रहे हैं। जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी और अन्य प्रगतिशील खेमे इस अधिकार के पैरोकार रहे हैं। अमेरिका में आज तक गर्भपात को जायज ठहराने वाला कोई कानून नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के 1973 में दिए एक फैसले के तहत इसे वैध ठहराया गया था। अब लीक हुई खबर के मुताबिक कोर्ट जून में उस फैसले को पलट देगा।

मंगलवार को देशभर में प्रोग्रेसिव समूहों की तरफ से विरोध प्रदर्शन किए गए। उधर राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बयान जारी कर कहा कि गर्भपात कराने या ना कराने के बारे में फैसला लेना महिलाओं का मूलभूत अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट रो. एंड वेड नाम से मशहूर 1973 के फैसले को पलट देता है, तो फिर गर्भपात के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को कानून बनाना चाहिए। बर्नी सैंडर्स सहित कई प्रोग्रेसिव सांसदों ने भी ऐसी ही मांग की है।
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दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देता है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने फैसला लीक होने की खबर की पूरी जांच की मांग की है। उन्होंने आरेप लगाया कि ये फैसला एक साजिश के तहत लीक किया गया, ताकि देश में विरोध भड़के और फैसला सुनाने से पहले जज दबाव में आ जाएं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गर्भपात के अधिकार के खिलाफ लगातार मुहिम चलाते रहे हैं। राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कई जज नियुक्त किए। तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में ऐसे जज चाहते हैं, जो गर्भपात को संवैधानिक अधिकार घोषित करने के 1973 के निर्णय को पलट दें। डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक टीकाकारों ने कहा है कि लीक हुआ फैसला ट्रंप के एजेंडे की कामयाबी है।  

विश्लेषकों ने कहा है कि राष्ट्रपति बाइडन और दूसरे डेमोक्रेटिक नेता गर्भपात के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाने की बात जरूर कर रहे हैं, लेकिन ऐसा करना आसान नहीं होगा। कानून पारित होने के लिए 100 सदस्यीय सीनेट में फिलिबस्टर नियम के तहत 60 सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 50 सीनेटर ही हैं। उप-राष्ट्रपति का एक अतिरिक्त वोट उनके पक्ष में है। फिर भी कुल समर्थक सदस्यों की संख्या 51 ही होती है। हालांकि राष्ट्रपति के पास फिलिबस्टर नियम को रद्द करने का अधिकार है, लेकिन जो बाइडन ऐसा करने से हिचकते रहे हैं।

टीवी चैनल सीएनएन ने कहा है कि पिछले जनवरी में उसके एक सर्वे में 69 फीसदी लोगों ने 1973 का निर्णय पलटने का विरोध किया था। सिर्फ 30 प्रतिशत लोग चाहते थे कि गर्भपात कराना संवैधानिक अधिकार ना रहे।

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