रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ 27 देशों के नेताओं ने द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की 80वीं वर्षगांठ मनाई। पुतिन ने रेड स्क्वायर पर विजय दिवस परेड को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, नाजी जर्मनी की हार मित्र देशों के साझा प्रयासों से संभव हुई। खासतौर पर यूरोप में 'नॉर्मंडी लैंडिंग' (दूसरा मोर्चा खोलना) ने 'महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध'में सोवियत लोगों की जीत को करीब लाने में मदद की।
उन्होंने कहा, मित्र देशों के साझा प्रयासों से ही नाजी जर्मनी, जापान और उनके सहयोगियों की हार संभव हो पाई। हम इसे हमेशा याद रखेंगे कि यूरोप में जब दूसरा मोर्चा खोला गया, तो सोवियत संघ की जमीन पर हुए निर्णायक युद्ध से जीत और करीब आ गई। इस कार्यक्रम में 27 देशों के नेता शामिल हुए, जिनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा भी शामिल हुए।
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कार्यक्रम में किन देशों के नेता हुए शामिल
भारत की ओर से रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 'ऑपरेशन सिंदूर' में व्यस्त होने के कारण विदेश यात्रा पर नहीं गए। कार्यक्रम में सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिच, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको, रिपब्लिका सर्पस्का के राष्ट्रपति मिलोराड डोडिक, बेलारूस के राष्ट्रपि अलेक्जेंडर लुकाशेंको, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाल-कैनेल, वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव तो लाम, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्तह अल-सीसी, फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, इथियोपिया के राष्ट्रपति ताए एत्स्के सेलास्सी, गिनी-बिसाऊ के राष्ट्रपति उमारो सिसोको एमाबो भी शामिल हुए।
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रेड स्क्वायर पर परेड में क्या था खास
इस वर्ष की परेड में 11 हजार से अधिक सैनिक शामिल हुए, जिनमें 1500 सैनिक यूक्रेन में जारी विशेष सैन्य अभियान से जुड़े थे। इस वर्ष की परेड में 11 हजार से अधिक सैनिक शामिल हुए, जिनमें 1500 सैनिक यूक्रेन में जारी विशेष सैन्य अभियान से जुड़े थे। परेड में द्वितीय विश्व युद्ध के 183 पुराने हथियारों के साथ-साथ नई आधुनिक हथियार प्रणाली का प्रदर्शन किया गया। 13 देशों के सैन्य दलों ने परेड में हिस्सा लिया, जिनमें चीन, मिस्र, मंगोलिया, म्यांमार और वियतनाम शामिल हैं। सीआईएस (पूर्व सोवियत संघ के देश) के सैन्य दल भी परेड में शामिल हुए। यूक्रेन में चल रहे विशेष सैन्य अभियान में भाग ले चुके अनुभवी सैनिकों ने भी रेड स्क्वायर पर मार्च किया।