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चीन की चुनौती: सहयोगी देशों के साथ सैन्य सहयोग और साझा नौसैनिक अभ्यास बढ़ाएगा अमेरिका

Tue, 19 Oct 2021 03:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला

सार

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सिर्फ इसी महीने दो बड़े नौसैनिक अभ्यास किए हैं। पहली बार ऐसा हुआ, जब एक सैनिक अभ्यास में अमेरिका के दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और ब्रिटेन के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-21 ने एक साथ हिस्सा लिया...
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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चीन के खिलाफ अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने अपनी ‘समेकित बचाव रणनीति’ (इंटीग्रेटेड डेटेरेंस स्ट्रेटेजी) में हाल के हफ्तों में नया जोर लगा दिया है। इसके तहत सहयोगी देशों के साथ सैनिक सहयोग बढ़ाया गया है। साझा नौसैनिक अभ्यास इसका एक प्रमुख हिस्सा हैं।

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अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सिर्फ इसी महीने दो बड़े नौसैनिक अभ्यास किए हैं। पहली बार ऐसा हुआ, जब एक सैनिक अभ्यास में अमेरिका के दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और ब्रिटेन के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-21 ने एक साथ हिस्सा लिया। उनके साथ जापानी लड़ाकू बेड़े भी थे। ये अभ्यास जापान के ओकिनावा क्षेत्र से जुड़े तट पर हुआ। उसके एक हफ्ते बाद अमेरिका मालाबार-2021 अभ्यास में शामिल हुआ। इस बार इस अभ्यास का दायरा पहले से बड़ा था। बंगाल की खाड़ी में हुए इस अभ्यास में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हुए।

इन अभ्यासों के तुरंत बाद अमेरिका के सहयोगी देश फिलीपींस ने बालिकातान संयुक्त अभ्यास फिर से शुरू करने का एलान किया है। इसमें अमेरिका के सहयोगी देशों के हजारों सैनिकों के भाग लेने की संभावना है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले फिलीपींस और अमेरिका ने अपने बीच ‘विजिटिंग फॉर्सेज एग्रीमेंट’ को पुनर्जीवित करने की घोषणा की थी। इस समझौते का मकसद फिलीपींस और अमेरिका के बीच नौसैनिक सहयोग बढ़ाना है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस समझौते को चीन की तरफ से बढ़ रही चुनौतियों के मद्देनजर पुनर्जीवित किया गया है।

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इंटीग्रेटेड डेटरेंस स्ट्रेटेजी का एलान इस साल के शुरू में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने अपनी सिंगापुर यात्रा के दौरान किया था। हालांकि इस बारे में अपने विचार वे अप्रैल में जता चुके थे। ऑस्टिन ने तब अमेरिकी राज्य हवाई में दिए एक भाषण में कहा था- ‘अमेरिका के पूरे इतिहास में डेटेरेंस का मतलब संभावित दुश्मनों के दिमाग में एक बुनियादी सच बैठा देना रहा है। ये सच यह है कि आक्रमण की लागत और उससे जुड़े जोखिम आक्रमण से होने वाले लाभ की तुलना में कहीं ज्यादा होंगे।’

ऑस्टिन ने कहा था- ‘इस बात को स्पष्ट करने के लिए हम अपनी मौजूदा क्षमताओं का उपयोग करेंगे और नई क्षमताएं विकसित करेंगे। उन सभी क्षमताओं का हम एक नेटवर्क के साथ इस्तेमाल करेंगे। यह नेटवर्क हमारे सहयोगियों और पार्टनर्स के हाथ मिलाने से बनेगा।’ हाल के महीनों में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के दूसरे अधिकारियों ने भी अमेरिका के नए डेटेरेंस सिद्धांत की चर्चा की है। उन्होंने साफ कहा है कि नया सिद्धांत चीन की बढ़ती सैनिक क्षमताओं के मद्देनजर विकसित किया गया है।

वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के रक्षा उपमंत्री ग्रेगरी एम कौसनर ने कहा था कि इंटीग्रेटेड डेटेरेंस टेक्नोलॉजी, सैन्य कार्रवाई की समझ और क्षमताओं के सही मेलजोल पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा था कि इन सबका एक ऐसा नेटवर्क होगा, जो विश्वसनीय, लचीला और शक्तिशाली हो, और जिससे दुश्मन ठहरने पर मजबूर हो जाए। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका ने हाल में ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ जो ऑकुस रक्षा समझौता किया, वह भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
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