वाशिंगटन में काम कर रहे अधिकार कार्यकर्ता का कहना है कि पाकिस्तानी सेना जिहादियों को समर्थन करती है और उन्हें अल्पसंख्यकों के खिलाफ इस्तेमाल करती है। कार्यकर्ता नदीम नुसरत ने बुधवार को कहा कि बीते कुछ सालों से पाक सेना उग्र हुई है और जिहादियों के समुदायों का समर्थन कर रही है। जिनका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों और अधिकार कार्यकर्ताओं का मारने के लिए किया जाता है।
फ्री कराची कैंपेन और मुत्ताहिदा कुआमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के पूर्व संयोजक नदीम नुसरत ने आगे कहा कि
अल्पसंख्यकों और अधिकार कार्यकर्ताओं को उनके अधिकार देने की बजाए पाकिस्तान सेना उन्हें मार रही है। साथ ही पाक न्यायपालिका अपनी भूमिका निभाने में भी असमर्थ है। अत्यधिक शोषण के परिणाम का ही परिणाम है कि
बलूच और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सड़कों पर आकर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बुधवार को रिलीज हुई एमनेस्टी रिपोर्ट में भी पाकिस्तान की निंदा की गई है।
नदीम का कहना है कि पाक हमेशा अपनी सेना के कंट्रोल में रहता है। राष्ट्र में पुलिस सरकार द्वारा बनाई जाती हैं न कि सेना द्वारा लेकिन पाकिस्तान में इसका उल्टा होता है। पाक में अल्पसंख्यक कष्ट झेल रहे हैं चाहे फिर वह जातीय तौर पर हो या धार्मिक तौर पर। उन्होंने कहा कि वह उदाहरण के तौर पर कहते हैं कि कराची से पाक के लिए तकरीबन 70 फीसदी राजस्व मिलता है। लेकिन कराची आधारित किसी भी व्यक्ति को पुलिस प्रावधान और सेना बलों में ढूंढ पाना बहुत ही मुश्किल है।
पाकिस्तान में कई जातीय समूहों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है। बंगाली लोगों ने भी 1971 तक कष्ट झेले और बाद में एक नया देश निर्मित किया। आज के समय में बलूच, पाशतो, सिंधी और अन्य कई समुदाय भी
कष्ट झेल रहे हैं।