प्रधानमंत्री सुगा ने इस महीने की शुरुआत में नेता पद छोड़ने का एलान किया था। उसके बाद नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। जापान में अगले 21 अक्टूबर के पहले डियेट का चुनाव भी होना है। उस चुनाव में एलडीपी नए नेता का चेहरा पेश करते हुए उतरेगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए इस बार का नेता पद का चुनाव अहम है। नए नेता को जनता के बीच जाने से पहले ज्यादा वक्त नहीं मिलेगा।
तारो कोनो की लोकप्रियता हाल में बढ़ी है। जापान लंबे समय तक कोरोना महामारी से जूझता रहा। वहां टीकाकरण की रफ्तार भी धीमी थी। उसी माहौल में टोक्यो में ओलिंपिक और पैरा ओलिंपिक खेल कराए गए। पर्यवेक्षकों में आम राय है कि महामारी को ठीक से ना संभाल पाना और उस दौरान ओलिंपिक खेलों को प्राथमिकता देना सुगा को भारी पड़ा। उससे उनकी लोकप्रियता गिरी और उन्हें पद छोड़ना पड़ा। सुगा लगभग एक साल ही प्रधानमंत्री रह पाए।
निक्कई एशिया और टीवी टोक्यो के सर्वे से सामने आया है कि तारो कोनो को हर उम्र वर्ग के कार्यकर्ताओं से लगभग समान समर्थन मिल रहा है। ज्यादातर युवा मतदाता भी उनके साथ हैँ। इस सर्वे के दौरान 51 फीसदी लोगों ने कहा कि कोनो ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान को ठीक ढंग से संचालित किया है। आर्थिक नीतियों के मामले में चारों उम्मीदवारों के बीच ज्यादा फर्क नहीं है। किशिदा ने देश में बढ़ी आर्थिक गैर-बराबरी को अपना प्रमुख मुद्दा जरूर बना रखा है। लेकिन सर्वे से जाहिर हुआ है कि एलडीपी कार्यकर्ताओं के बीच ये मुद्दा ज्यादा ध्यान नहीं खींच पाया है।