चीन की बढ़ती सैन्य, आर्थिक और साइबर गतिविधियों को लेकर जापान और उसके सहयोगी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) जासूसी, समुद्री घुसपैठ और आर्थिक दबाव के जरिए जापान पर लगातार दबाव बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह सिर्फ जापान की सुरक्षा का नहीं, बल्कि नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी सवाल है।
यह भी पढ़ें-
Cargo Ship Attacked in Red Sea: यमन के पास लाल सागर में मालवाहक जहाज पर हमला, हूतियों ने क्या दी थी चेतावनी?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जापान के सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और अन्य अत्याधुनिक उद्योग चीनी खुफिया नेटवर्क के निशाने पर हैं। साइबर हमलों और अंदरूनी लोगों की भर्ती के जरिए संवेदनशील तकनीक हासिल करने की कोशिश की जा रही है। इससे निपटने के लिए जापान को अपनी काउंटर-इंटेलिजेंस व्यवस्था मजबूत करने, शैक्षणिक आदान-प्रदान की निगरानी बढ़ाने और अमेरिका व यूरोपीय संघ के साथ मिलकर तकनीक चोरी रोकने के लिए संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन के तटरक्षक जहाज और मछली पकड़ने वाले पोत अक्सर सेनकाकू द्वीप के आसपास के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। जापान इस द्वीप समूह पर अपना अधिकार जताता है, जबकि चीन भी इस पर दावा करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये गतिविधियां केवल उकसावे की कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि जापान की संप्रभुता को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा हैं। इसलिए जापान को समुद्री गश्त बढ़ाने, निगरानी मजबूत करने और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने चाहिए।
रिपोर्ट के लेखक और तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के भतीजे खेदरूब थोंडुप ने कहा कि चीन की रणनीति कई स्तरों पर काम करती है, इसलिए उसका जवाब भी समन्वित होना चाहिए। उनका कहना है कि जापान अकेले इस चुनौती का सामना नहीं कर सकता और उसके सहयोगियों को यह समझना होगा कि जापान की सुरक्षा, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
इस बीच, मई 2026 में जापान के उप मुख्य कैबिनेट सचिव मसानाओ ओजाकी ने चीन और रूस के उस आरोप को खारिज कर दिया था, जिसमें जापान पर 'दोबारा सैन्य शक्ति बढ़ाने' का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा था कि चीन की सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और रूस का यूक्रेन पर हमला भी वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।
यह भी पढ़ें-
Iran: खामेनेई के जनाजे में शामिल हुए तीन बेटे, नहीं दिखे सुप्रीम लीडर मोजतबा; आखिर क्यों बनाई दूरी?
चीन और जापान के बीच तनाव पिछले कुछ समय से बढ़ा हुआ है। नवंबर 2025 में जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने संसद में कहा था कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज प्रतिक्रिया दे सकती हैं। इसके बाद दोनों देशों के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग के जरिए उसका एकीकरण करने की बात कहता है।